इसे संकोच कहा जाए या सामाजिक बंधन। शहर की महिला पार्षद खुलकर अपने अधिकार का प्रयोग नहीं कर पा रही हैं। उनकी जगह वार्ड से लेकर पालिका तक घर के पुरुष ही काम करते हैं। इंटर तक की शिक्षा ग्रहण करने वाली छाया श्रीवास्तव टक्करगंज वार्ड की पार्षद हैं। मगर काम उनके देवर ज्ञानेन्द्र श्रीवास्तव उर्फ अज्जू देखते हैं।
नगर पालिका से प्राप्त पार्षदों की सूची में उनके नाम के सामने उनका मोबाइल नंबर लिखा है। ‘अमर उजाला’ ने मंगलवार को टक्करगंज की पार्षद छाया श्रीवास्तव के उस नंबर पर फोन लगाया। घंटी गई तो सभासद के देवर अज्जू ने फोन उठाया और कहा कि वह आधे घंटे बाद मिलेंगे। पार्षद भाभी हैं। आधे घंटे बाद टीम उनके घर पहुंची तो पार्षद मौजूद थीं। सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वार्ड में कई काम हुए हैं। पानी की समस्या बताते हुए उन्होंने हैंडपंपों को लगवाने का दावा किया। वार्ड में जा कर काम देखने की बात पूछी गई तो वे हंसते हुए बोलीं, हां जाते रहते हैं।
इतने में उनके देवर अज्जू भी आ गए तो वे चाय बनाने चली गईं। आने पर जब ये पूछा गया कि वार्ड में काम का कुछ प्रस्ताव वे बनाई हैं तो वह चुप हो गई। अज्जू ने कहा कि वार्ड में 1800 वोटर हैं, ये सबसे छोटा वार्ड है। हमारे पास कोई अधिकार तो है नहीं, जो हो सकता है उसे करते हैं। लोग आते हैं तो वे उन्हें निराश नहीं होने देते। टीम वहां से निकली और वार्ड के लोगों से मिली। वार्ड के लोगों ने बताया कि पार्षद स्वयं काम देखने नहीं आतीं। उनके देवर अज्जू ही सारा काम देखते हैं। नाम पूछा गया तो वे लोग बताने से मुकर गए। बोले जो सच है बता दिया अब नाम छाप कर क्या करेंगे?