brick company owner gave to labourers cycle and 200 rupees and sent to their village vihar
- फोटो : PRATAPGARH
ईंट भट्ठा बंद होने के बाद काम करने वाले मजदूरों के सामने खाने का संकट पैदा हो गया। परेशान सात ईंट भट्ठा मजदूरों को साइकिल व दो सौ रुपये देकर ईंट भट्ठा मालिक ने घर भेज दिया। चार दिन का सफर तय करने के बाद सभी घर पहुंचे। रास्ते में उन्हें कोई मदद नहीं मिली। भूखे पेट सैकड़ों किमी सफर करते रहे।
विहार बाजार के रहने वाले मनीष कुमार, दूधनाथ, होरीलाल, राजेश, शिवमूरत, धर्मेंद्र व दिनेश बिहार प्रांत के मुजफ्फरपुर में ईंट भट्ठे पर काम करते थे। कोरोना संक्रमण के चलते लाकडाउन के बाद सभी का काम धंधा बंद हो गया। जो रुपये कमाए थे। उसे भी लोगों ने खाने पीने में खर्च कर डाला। अब उनके सामने खाने की समस्या खड़ी होने लगी थी। ईंट भट्ठा मालिक ने कुछ मदद की लेकिन वह पर्याप्त नहीं था। खाने पीने की किल्लत के बीच एक समय फांका भी करना पड़ रहा था। ऐसे में ईंट भट्ठा मालिक ने सभी को एक-एक नई साइकिल व दो सौ रुपये रास्ते का खर्च देकर घर भेजा। गुरुवार को सभी साइकिल से घर के लिए चल पड़े। रास्ते में अंधेरा होने पर चौराहे या मुख्य बाजार में रुककर आराम किया।
लाई, चना व गुड़ खाते पीते हुए आगे बढ़ते रहे। रास्ते में पुलिसकर्मियों ने सभी की खूब मदद की। खाना भी खिलाया और घर जाने का रास्ता भी आसान किया। रविवार दोपहर सभी शहर पहुंचे। जिला अस्पताल में सभी की जांच कराई गई। इसके बाद सभी को घर के लिए यह कहते हुए रवाना किया गया वे लोग होम क्वारंटाइन रहेंगे। इसके बाद सभी ने फिर साइकिल से घर का सफर तय कर दिया। देर शाम सभी सैकड़ों किमी साइकिल चलाकर घर पहुंचे। परिवार के लोगों की आंखों में खुशी के आंसू आ गए।