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जिला अस्पताल में पुराने भवनों को तोड़ने पर लग सकती है रोक

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जिला अस्पताल में पुराने भवन को तोड़कर सात मंजिला नए भवन के निर्माण पर रोक लग सकती है। अस्पताल में तैनात फार्मासिस्ट और नर्सेज संगठन के पदाधिकारी हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। अस्पताल के समीप रहने के लिए व्यवस्था देने के बाद ही पुराने भवन को तोड़ने की मांग उठाई है। न्यायालय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सीएमएस और सीएमओ को तलब कर लिया है। हालाकि अफसर अभी इस मामले में कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।
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प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपद वासियों को मेडिकल कॉलेज की सौगात दी है। मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए शासन ने राजकीय निर्माण निगम रायबरेली को जिम्मेदारी भी दे रखी है। कॉलेज निर्माण तो पूरे केशवराय में शुरू हो गया है।
अब जिला अस्पताल को उच्चीकृत करने के लिए सात मंजिला भवन तैयार करना है। जिला अस्पताल परिसर में स्थित स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट और वार्डब्वाय के जर्जर भवन को ढहाया जाना है। शासन के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग के जेई ने जर्जर 35 भवनों में खतरे का निशान लगवा दिया।
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भवन को तोड़वाने के लिए टेंडर निकालने की तैयारी स्वास्थ्य विभाग कर ही रहा था कि जिला अस्पताल के फार्मासिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष एसवी शुक्ला, मैट्रन सुशीला सहित 16 कर्मचारियों ने आपत्ति जताया। कर्मचारियों ने प्रभारी सीएमएस डॉक्टर इम्तियाज और सीएमओ डॉक्टर एके श्रीवास्तव से मिलकर पुराने भवन को तोड़ने के पहले उनके लिए रहने का ठिकाना देने की मांग उठाई। मगर सीएमएस और सीएमओ ने स्वास्थ्य कर्मचारियों की एक भी नहीं सुनी।
इससे स्वास्थ्य कर्मचारी नाराज होकर उच्च न्यायालय की शरण में पहुंचे। स्वास्थ्य कर्मचारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने भवन को तोड़े जाने पर रोक लगा दिया है। जिला अस्पताल के सीएमएस और स्वास्थ्य विभाग के मुखिया सीएमओ को 15 अक्तूबर को तलब किया है। सीएमओ एके श्रीवास्तव ने कहा कि मेडिकल कॉलेज निर्माण की मंजूरी मिली है। मेडिकल कॉलेज बनकर रहेगा। 15 को न्यायालय में अपना पक्ष रखा जाएगा।
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