फतनपुर के कोयम गांव से चार दिन पहले मजदूर छोटू का तीन वर्षीय बेटा मोनू गायब हो गया। बुधवार को गांव में ही एक खेत से उसका क्षत विक्षत शव मिला। परिवार के लोगों ने बालक की हत्या कर शव खेत में फेंकने का आरोप लगाया है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।
बिहार के औरंगाबाद जनपद के दाऊद नगर निवासी छोटू अपने साथियों के साथ फतनपुर थाना क्षेत्र के कोयम गांव में आरसीसी व नाली के निर्माण कार्य में मजदूरी कर परिवार का गुजर बसर करता है। माह भर पहले वह अपने परिवार के साथ रहकर काम करता था। शनिवार को वह नाली निर्माण का कार्य कर रहा था। इस बीच दोपहर में उसका तीन वर्षीय बेटा मोनू कुमार अचानक ठिकाने से गायब हो गया। काफी खोजबीन के बाद भी उसका पता नहीं चला। पिता छोटू की शिकायत पर फतनपुर पुलिस ने गुमशुदगी का मुकदमा दर्ज कर लिया। पुलिस ने बालक को खोजने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किया। बुधवार दोपहर को गांव के करीब गेहूं के खेत में गायब मोनू का क्षत विक्षत शव ग्रामीणों ने देखा। सूचना मिलने पर परिवार संग छोटू रोते बिलखते मौके पर पहुंचा। गायब बालक का शव देख छोटू व साथ आए मजदूर आक्रोशित हो उठे। वे बालक की हत्या कर शव फेंकने का आरोप लगाते हुए पुलिस पर आरोप लगाने लगे। छोटू का कहना था कि पुलिस उसके गायब बेटे को खोजने में दिलचस्पी नहीं ली। मृतक मोनू तीन भाइयों में सबसे छोटा था। दोनों भाई सूरज व गोलू रोते बिलखते रहे। मां आरती व पिता छोटू बच्चों को संभालते रहे। थानाध्यक्ष अभिषेक सिरोही ने बताया कि मासूम बालक का शव जंगली जानवरों के नोचने से क्षत विक्षत हो गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वजह स्पष्ट होगी। बालक की हत्या कोई क्यों करेगा। फिलहाल परिवार वालों से बातचीत कर उनके आरोपों की बाबत छानबीन की जा रही है।
सजग होती पुलिस तो बच सकती थी बालक की जान
बीरापुर। गेहूं के खेत में मासूम बालक मोनू का शव मिलने के बाद मजदूरों के अलावा गांव के लोग भी गुस्से में नजर आए। ग्रामीणों का कहना था कि यदि पुलिस सजग होती तो उसकी जान बच सकती थी। गुमशुदगी का मुकदमा दर्ज करने के बाद परिवार के लोगों से पूछताछ कर उसकी समय पर खोजबीन नहीं की।