चुनाव की रणभेरी बजे एक सप्ताह होने वाले हैं, लेकिन मैदान से योद्धा गायब हैं। जिले में अभी बसपा को छोड़कर किसी पार्टी ने सभी सीटों पर प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। भाजपा-कांग्रेस और अपना दल के एक भी प्रत्याशी घोषित नहीं हुए हैं तो सपाई भी परिवार के झगड़े और सिंबल को लेकर चल रही खींचतान से ऊहापोह की स्थिति में हैं। चुनाव को लेकर प्रशासनिक तैयारियां भले ही तेज हो गई हों, लेकिन नेताओं की सरगर्मी गायब है। अकेले बसपा के प्रत्याशी ही पूरा मैदान मथ रहे हैं।
बहुजन समाज पार्टी ने वैसे तो जिले की सातों विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों के नामों की घोषणा बहुत पहले कर दी थी। बीच में विश्वनाथगंज सीट से प्रत्याशी बदला। इसके बाद बीते तीन दिनों में बसपा मुखिया मायावती ने फिर से सूची जारी कर सभी सीटों पर प्रत्याशियों के नाम की मुहर लगा दी। अब बसपा के प्रत्याशी अपने चुनावी अभियान में लग गए हैं। सपा की तरफ से जिले की चार सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए गए थे, लेकिन इसके तुरंत बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने प्रत्याशियों की सूची अलग से जारी कर दी। हालांकि इसमें तीन सीटों पर दोनों सूचियों में कॉमन प्रत्याशी थे, लेकिन पट्टी सीट पर सपा और मुख्यमंत्री के अलग-अलग प्रत्याशी से होने से सपाई दो फाड़ हो गए। इस बीच परिवार और सिंबल को लेकर चुनाव आयोग पहुंचे झगड़े से स्थानीय सपा नेता और कार्यकर्ता ऊहापोह की स्थिति में हैं। शीर्ष स्तर पर हर दिन बदल रहे घटनाक्रम के चलते वह कुछ तय नहीं कर पा रहे हैं। प्रत्याशियों, टिकट के दावेदारों के साथ कार्यकर्ताओं की भी निगाह सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर टिकी हुई है। इससे चुनाव की तैयारियां प्रभावित हो रही हैं। सपा के ज्यादातर प्रत्याशियों ने लखनऊ में डेरा डाल रखा है।
इसी तरह अपना दल में भी पार्टी के चुनाव चिह्न को लेकर विवाद है। ऐसे में अभी तक प्रत्याशी घोषित नहीं किए जा सके हैं। हालांकि टिकट के दावेदार अपने विधानसभा क्षेत्रों में चक्कर जरूर लगा रहे हैं। कांग्रेस के साथ भी यही स्थिति अभी तक टिकट घोषित नहीं हो सका है। अंदरखाने में चर्चा है कि सपा के दो फाड़ होने की स्थिति में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व वाले दल से कांग्रेस का गठबंधन हो सकता है। इसी के चलते अभी कांग्रेस ने भी प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं। भारतीय जनता पार्टी में टिकट के दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है। प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य के 14 जनवरी के बाद प्रत्याशियों के नाम की घोषणा करने का बयान सामने आने के बाद टिकट के ज्यादातर दावेदार दिल्ली दरबार पहुंच गए हैं। कुछ भाजपा अध्यक्ष अमित शाह तो कुछ कद्दावर केंद्रीय मंत्रियों से टिकट के लिए जुगाड़ लगा रहे हैं।