कानपुर के बिकरू में दो जुलाई 2020 को हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे गिरोह से मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए दरोगा अनूप सिंह की पत्नी नीतू सिंह को दो साल बाद भी नौकरी नहीं मिल सकी। हालांकि 15 दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिवार के लोगों से मुलाकात कर जल्द से जल्द नियुक्ति पत्र मिलने का भरोसा दिलाया। अनूप की शहादत पर सत्ता दल के नेताओं ने तमाम वादे किए, मगर उनमें से कई आज भी अधूरे हैं। तत्कालीन विधायक डॉ. आरके वर्मा की पहल पर घर तक सड़क बनी थी, लेकिन वह भी सालभर में जर्जर हो गई। न तो स्मारक बना और न ही पानी की टंकी का निर्माण हो सका। गांव की सीमा पर प्रवेश द्वार का भी निर्माण नहीं कराया जा सका।
मानधाता थाना क्षेत्र के बेलखरी निवासी अनूप सिंह पुलिस की सेवा में वर्ष 2004 में शामिल हुए थे। वर्ष 2015 में वह दरोगा बने। उन्नाव में ट्रेनिंग करने के बाद उनकी पहली तैनाती वर्ष 2017 में कानपुर में हुई थी। दो जुलाई 2020 की रात बिकरू में दबिश के दौरान हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे गैंग से पुलिस की मुठभेड़ हो गई। जिसमें दरोगा अनूप सिंह शहीद हो गए।