12वीं राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में सौ से ऊपर की आबादी वाले 4,636 मजरों का विद्युतीकरण बजट के अभाव में लटक गया है। रुपये कम पड़ने के कारण काम रोक दिया गया है। इन सभी मजरों को रोशन करने में लगी कार्यदायी संस्था को करीब एक सौ साठ करोड़ रुपये चाहिए, जबकि उसके पास एक सौ बीस करोड़ राशि ही शेष हैं। बाकी रकम मिलने के इंतजार कर रही है।
जिले में बारहवीं राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत इस समय सौ से ऊपर वाले 5,013 मजरों का विद्युतीकरण किया जाना प्रस्तावित है। विद्युतीकरण करा रही कंपनी ने सर्वे कराया तो पता चला कि जिन 5013 मजरों की सूची उसको दी गई है उसमें से 377 मजरे 11वीं योजना में ही संतृप्त हो चुके थे। लिहाजा अब कंपनी को केवल 4636 मजरों का ही विद्युतीकरण करना था। शुरू में विद्युतीकरण के लिये भारत सरकार ने एक सौ बीस करोड़ रुपये का बजट दिया था। सर्वे के दौरान पता चला कि इतने मजरों के विद्युतीकरण के लिये यह धनराशि कम पड़ रही है। कंपनी का कहना है कि इसके लिये करीब एक सौ साठ करोड़ रुपये चाहिए। इसका प्रस्ताव दोबारा बनाकर भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय के पास भेजा गया है। जब तक वहां से धन आ नहीं जाता विद्युतीकरण का कार्य पूरा नही हो पायेगा। इसके लिये धन कब आयेगा इसका कुछ पता नहीं है।
आंख मूंदकर किया गया सर्वे
आंकड़े बताते हैं कि 11वीं और 12वीं राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में मजरों का सर्वे आंख मूंदकर हुआ है। 11वीं में 182 और 12वीं में 377 संतृप्त मजरों को दोबारा विद्युतीकरण की सूची में शामिल किया जाना सर्वे की प्रक्रिया पर उंगली उठाता है। हालांकि जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद जब सर्वे रिपोर्ट पर हंगामा हुआ तो कार्यदायी संस्था और जिम्मेदार लोगों को बैकफुट पर आना पड़ा। बाद में लोगों को संतृप्त मजरों को सर्वे सूची से निकालना पड़ा। इसका बजट भी अलग किया गया।