बेल्हा का दशहरा और भरत मिलाप सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल भी है। हर वर्ष की तरह इस बार भी पप्पू खां के बनाए लंकेश, कुुंभकरण और मेघनाद के जीवंत पुतले का अंत बब्बू सांई के हाथों तैयार किए गए राम, लक्ष्मण करेंगे। इसके साथ ही विजय जुलूस में करम अली के बैंड की धुन पर राम की सेना में शामिल वानर, रीछ और भालू थिरकेंगे।
अचलपुर रोड निवासी पप्पू उर्फ रिजवानखां की पीढ़ियां आठ दशक से रामलीला समिति प्रतापगढ़ से जुड़ी हैं। समिति की स्थापना 1935 में हुई थी। तब से ये हर साल कमेटी के लिये पुतला बनाते हैं। इस बार भी पुतले को जीवंतता प्रदान करने में लगे हुए हैं। मंगलवार को इनके द्वारा बनाए गए रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतले का दहन किया जाएगा। पप्पू का कहना है कि पहले उनके नाना इस काम को करते थे उन्होंने उनसे ही सीखा है। इसी समय से शहर के मशहूर बैंड मास्टर करम अली की टीम भी अपना पूरा सहयोग मेले को देंगे। रावण का अंत करने के बाद जशभन का माहौल होगा। इस अवसर पर रामलीला कमेटी के द्वारा निकाले गए विजय जुलूस में शामिल श्रीराम की सेना के वानर, रीछ और भालू बने कलाकार डांस करेंगे। मेले को ऐतिहासकि बनाने के लिये बैंड पार्टी इस दिन खाली रहती है कोई बुकिंग नहीं लेती है। इन सबके बीच अगर बब्बू सांई का जिक्र न हो तो दहशरे की रौनक ही चली जाएगी। चिलबिला सांई कुटी में रहने वाले बब्बू सांई बताते हैं कि जब वे किशोर थे तभी से ही वे रामलीला के कलाकारों के मेकअपमैन हैं। पहले यह काम उनके परिवार पिता जी करते थे। आज उनकी उम्र साठ के आस-पास पहुंच रही है मगर कमेटी को वे अपनी सेवाएं दे रहे हैं। साज-सज्जा के जरिए ये राम,लक्ष्मण, सीता, रावण और कुंभकरण जैसे पात्रों को जीवंतता प्रदान करते हैं। दशहरा के दिन इन्हीं के द्वारा सजाए गए राम, लक्ष्मण रामलीला मैदान में तीरों की बौछार करके लंकेश और उसकी सेना को हराएंगे। इनके हाथों रावण, कुंभकरण, मेघनाद का वध होगा।
चालीस फुट ऊंचे पुतले का दहनः मंगलवार को रामलीला मैदान में चालीस फुट ऊंचे पुतले का दहन राम और लक्ष्मण करेंगे। रामलीला कमेटी के मंत्री विक्कू ने बताया कि पुतले में आग शाम करीब सवा पांच बजे लगेगी। पुतला करीब चालीस फीट ऊंचा है। राम और लक्ष्मण के अतिशबाजी वाले बाण से इनका भेदन किया जायेगा। इसके पहले राम और रावण की सेना में युुद्ध होगा।