2017 के विधानसभा चुनाव ने बेल्हा को दो नए माननीय दिए हैं। सदर विधानसभा से अपना दल (एस) के प्रत्याशी संगमलाल गुप्ता और रानीगंज से भाजपा प्रत्याशी धीरज ओझा को पहली बार विधायक बनने का गौरव हासिल हुआ है। खास बात यह है कि दोनों का यह पहला चुनाव था। अपने पहले ही चुनाव में दोनों ने बड़े धुरंधरों को धूल चटा दिया।
सदर विधानसभा सीट से भाजपा से टिकट के लिए आधा दर्जन से अधिक नेता लाइन में लगे थे। इनमें से कई पार्टी के बड़े नेताओं के संपर्क में थे। नगरपालिका अध्यक्ष हरिप्रताप सिंह ने भी टिकट के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था। भाजपा के सभी उम्मीदवारों को उस समय तगड़ा झटका लगा था जब यह सीट भाजपा-अपना दल के गठबंधन के समझौते में अपना दल के खाते में चली गई। संगमलाल गुप्ता भी इससे पहले भाजपा से ही टिकट के लिए दावेदारी कर रहे थे। अपना दल के खाते में सीट जाने के बाद भाजपा से टिकट न मिलते देख उन्होंने पाला बदल लिया और अपना दल (एस) में शामिल हो गए और पार्टी ने उन्हें प्रतापगढ़ सदर से प्रत्याशी घोषित कर दिया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह खुद सदर में संगमलाल के पक्ष में जनसभा करने के लिए भी आए थे।
इसका नतीजा रहा कि मोदी लहर पर सवार संगमलाल ने अपने पहले ही चुनाव में सपा और बसपा के धुरंधरों को मात दे दी और विधायक बन गए। रानीगंज से विधायक चुने गए धीरज ओझा अभी सालभर पहले ही भाजपा से जिला पंचायत सदस्य चुने गए थे। धीरज को जमीनी नेता माना जाता है। सदर की तरह यहां से भी टिकट के लिए आधा दर्जन से अधिक लोग कतार में थे, लेकिन जमीनी हकीकत खंगालने और जुझारूपन को देखते हुए पार्टी ने सबको दरकिनार कर यहां धीरज ओझा पर विश्वास जताया। धीरज ने पार्टी के फैसले को सही साबित किया और राजनीति के माहिर खिलाड़ी शिवाकांत ओझा को धूल चटा दी।