मरीजों की सहूलियत के लिए शासन ने तीस-तीस बेड के सीएचसी तैयार कराया है, मगर अधिकांश केंद्रों में महज 10 से 15 बेड की व्यवस्था है। बाकी बेड कहां गायब हो गए, इसके बारे में जिम्मेदार अफसर तक जानकारी नहीं दे पा रहे हैं। इससे मरीज परेशान होते हैं। चिकित्सक तत्काल गंभीर रोगी बताकर रेफर कर देते हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रानीगंज, कोहड़ौर, बेलखरनाथ, गौरा, कहला, नारायणनपुर, ढिढुई, मानापुर, अरैला, हरीपुर बरदैता और पृथ्वीगंज में मरीजों की सहूलियत के लिए शासन ने सीएचसी की स्थापना की है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि इन अस्पतालों में मरीजों को भर्ती कर इलाज करने के लिए तीस-तीस बेड की व्यवस्था की गई है। 24 घंटे अस्पतालों का संचालन किया जाता है। हालांकि हकीकत कुछ और है।
रानीगंज सीएचसी में तीस बेड की व्यवस्था थी, मगर मौजूदा समय में यहां पर महज 10 बेड का आयुष्मान वार्ड, सात बेड का लेबररूम, तीन बेड का जनरल तो एक बेड का इमरजेंसी बनाया गया है। सीएचसी अधीक्षक रजनीश प्रियदर्शी का कहना है कि बाकी बेड को ट्रामा सेंटर भेज दिया गया है। उधर, कोहड़ौर में मौजूूदा समय में 14 बेड हैं। अधीक्षक भरत पाठक ने बताया कि एक वार्ड को खाली कराया गया है।
बेलखरनाथ सीएचसी में तीस के बजाय 15 ही बेड हैं। गौरा में 20 बेड, कहला में 15, नारायणपुर,ढिढुई, मानापुर, अरैला, हरीपुर बरदैता, पृथ्वीगंज, साल्हीपुर कंजास, गड़वारा में 10-10 बेड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन हो रहा है। ज्यादातर सीएचसी 24 घंटे के बजाय महज आठ से बारह घंटे संचालित किए जा रहे हैं। जिम्मेदार इससे पूरी तरह अनजान बने हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तीस बेड के होते हैं। अस्पतालों के संचालन से पहले तीस बेड आए थे। बेड कहां गए, इसकी जांच कराई जाएगी। यदि बेड कम मिले तो अधीक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। डॉक्टर एसके सिंह, डिप्टी सीएमओ
कोहडौर सीएचसी में खाली पड़ा इमरजेंसी कक्ष। संवाद- फोटो : PRATAPGARH