मीराभवन स्थित स्टेडियम में बास्केटबॉल कोच की चार साल से तैनाती न होने की वजह से खिलाड़ी खेल की बारीकियां नहीं सीख पा रहे हैं। वह खुद को बेहतर करने के लिए एआई, ऑनलाइन वीडियो की मदद ले रहे हैं।
अपने को निखारने के लिए बगैर कोच के अभ्यास कर पसीना बहा रहे हैं। स्टेडियम में रोजाना आठ से 10 बास्केटबॉल खिलाड़ी खेल की बारीकी सीखने आते हैं लेकिन यहां उन्हें सिखाने वाला कोई नहीं है। इस दौरान सीनियर और साथी ही उनके गुरु बनते हैं।
चार साल पहले बास्केटबॉल के प्रशिक्षक थे लेकिन उनका तबादला हो जाने के बाद से अभी तक कोई नया कोच नियुक्त नहीं हुआ। प्रशिक्षक न होने से कई खिलाड़ी निजी अकादमी का सहारा ले रहे हैं। नए खेल सत्र की शुरुआत हो चुकी है। खिलाड़ियों को इस सत्र में प्रशिक्षक का इंतजार है।
वर्जन
स्टेडियम में बास्केटबॉल कोर्ट खुला है। प्रशिक्षक नहीं हैं। क्रीड़ाधिकारी से पूछकर अपनी बॉल लेकर आते हैं और आपस में टीम बनाकर खुद ही अभ्यास करते हैं।
मयंक सिंह, बास्केटबॉल खिलाड़ी
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स्टेडियम में प्रशिक्षक की तैनाती नहीं है। कोर्ट में सभी खिलाड़ी खुद से अभ्यास करते हैं। कमियों को बताने वाला कोई नहीं है। कभी-कभी सीनियर खिलाड़ियों का मार्गदर्शन मिल जाता है तो बारीकियां सीखने में मदद मिलती है।
अनिकेत सिंह, बास्केटबॉल खिलाड़ी
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वर्जन-
प्रशिक्षक की नियुक्ति के लिए खेल निदेशालय को पत्र भेजा गया है। जल्द ही विभाग से बास्केटबॉल कोच की तैनाती की जाएगी।
- रंजीत यादव, प्रभारी जिला क्रीड़ाधिकारी