बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक कर्मियों की मंगलवार को एकदिनी हड़ताल के चलते करोड़ों रुपये का व्यवसाय प्रभावित हुआ। क्षेत्रीय कार्यालय के बाहर जमा हुए कर्मचारियों ने निजीकरण, कम स्टॉफ और अधिक काम का विरोध किया। बैंकों में काम करने वाले दैनिक वेतनभोगी कर्मियों को नियमित करने की मांग की।
बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक इंप्लाइज यूनियन एवं आफीसर्स एसोसिएशन के कर्मचारी नेताओं ने अपनी मांगों को लेकर तालाबंदी कर अपनी आवाज बुलंद की। एकजुट कर्मचारियों ने एकता प्रदर्शित करते हुए जिले भर की शाखाओं को बंद रखा। इंप्लाइज यूनियन के जिलामंत्री एसपी मिश्रा ने एसके मित्रा कमेटी की रिपोर्ट को कर्मचारी विरोधी बताते हुए कहा कि कम स्टॉफ और अधिक काम से कर्मचारी तनाव में रहते हैं।
संयुक्त सचिव शैलेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने ग्रामीण बैंकों का निजीकरण करने की दिशा में जो प्रयास किया है उसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। धरना-प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे कामरेड वीके पांडेय ने दसवें वेतन समझौते को बगैर बदलाव के लागू करने की मांग की। पूर्व क्षेत्रीय मंत्री डीपी सिंह ने बैंक में कार्यरत दैनिक भोगी और सफाई कर्मचारियों को नियमित करने की मांग उठाई। कामरेड शरद श्रीवास्तव ने कहा कि यह कर्मचारियों की सांकेतिक हड़ताल है। अगर प्रबंधन ने जल्द ही कर्मचारियों के हित में कदम नहीं उठाया तो कर्मचारी आंदोलन छेड़ने के लिए बाध्य होंगे। कर्मचारियों की हड़ताल के चलते जिले की 96 शाखाओं में दिनभर ताला लटकता रहा। इस मौके पर वीपी त्रिपाठी, एमके सिंह, अमृतलाल, सोमनाथ मिश्र, राघवेंद्र, मनीष, विजय, मिथलेश, नीरज, सचिन, राघवेंद्र सिंह, मदन जायसवाल, रवि प्रकाश, हीरालाल यादव, ध्रुव कुमार जैन आदि मौजूद रहे।