दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की महत्वाकांक्षी माइक्रो कामधेनु योजना बैंकों के असहयोग के चलते सफल नहीं हो पा रही है। विभाग लाभार्थियों का चयन कर रहा है और बैंक उसे डिफाल्टर बताकर ऋण देने से हाथ खड़ा कर दे रहे हैं। इससे जिले को पिछले वर्ष मिला लक्ष्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है।
जिले में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए जिले में कामधेनु, मिनी कामधेनु और माइक्रो कामधेनु योजना प्रारंभ की गई है। विभागीय अधिकारियों के भरसक प्रयास करने पर कामधेनु योजना और मिनी कामधेनु योजना का लक्ष्य तो पूरा हो गया है, मगर माइक्रो कामधेनु योजना के तहत जिले को 45 इकाई का लक्ष्य मिला हुआ है। इस योजना में लाभार्थी को 19.20 लाख रुपये बैंक से ऋण मिलता है जिसका ब्याज विभाग अदा करता है। विभाग ने मानक पर खरे उतरने वाले 45 लाभार्थियों का चयन कर निकट के बैंकों में भेजकर ऋण मंजूर करने को कहा। विभिन्न बैंकों ने 35 लाभार्थियों को तो ऋण प्रदान कर दिया, मगर 10 लाभार्थियों की फाइल अभी लंबित है। इससे वह कभी विभाग तो कभी बैंक का चक्कर लगा रहे हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि पहले तो लाभार्थियों तो फाइल तैयार कराने में महीनों विभाग का चक्कर लगाना पड़ा और अब बैंक पहुंचने के बाद उन्हें डिफाल्टर घोषित कर दिया गया है।
जबकि फाइल तैयार कराने के पहले विभाग ने बैंकों से लिखित सहमति प्राप्त की थी कि अमुक व्यक्ति पात्र है और उसे ऋण दिया जा सकता है। बैंकों की बेरुखी से परेशान विभागीय अधिकारियों को अब लक्ष्य पूरा करने में मशक्कत हो रही है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. वीपी सिंह ने बताया कि लक्ष्य पूरा होने में बैंकों के शाखा प्रबंधक बाधक बने हुए हैं। उन्होंने बताया कि लक्ष्य कम करने के लिए निदेशालय को पत्र लिखा गया है।