बैंक ऑफ बड़ौदा के अफसरों की मनमानी के चलते बड़ौदा उप्र क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के ग्राहकों को नकदी के लिए जूझना पड़ रहा है। जिले के ग्रामीण इलाकों में स्थित बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की 97 शाखाओं के लिए हर दिन 10 करोड़ की मांग की जा रही है, लेकिन उन्हें सिर्फ दो करोड़ रुपये ही मुहैया कराए जा रहे हैं। वह भी दो दिन में। इससे ग्रामीण इलाके में नगदी का संकट दूर नहीं हो पा रहा है। हर दिन हंगामा, बवाल और मारपीट हो रही है।
नोटबंदी के पखवारे भर बाद शहरों में धीरे-धीरे हालात सामान्य होने लगे हैं, लेकिन ग्रामीण इलाके में अब भी जबरदस्त संकट बना हुआ है। रुपये बदलना तो दूर लोग खाते से निकाल भी नहीं पा रहे हैं। हर दिन सुबह होते ही लोग बैंकों के सामने लाइन में खड़े हो जाते हैं। बैंककर्मी उन्हें मुख्य शाखा से रुपये आने का आश्वासन देते रहते हैं। दोपहर बाद तक जब रुपये नहीं मिलते तो ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे जाता है और वे बवाल करने पर उतारू हो जाते हैं। ग्रामीण इलाके में सबसे ज्यादा शाखाएं बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की हैं। मंगलवार को जगेशरगंज और जामताली में नकदी न मिलने से नाराज ग्राहकों ने जिस प्रकार शाखा परिसर में तालाबंदी करके नाराजगी जताई, उससे क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के अफसरों की परेशानी बढ़ गई है। बड़ौदा उप्र क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक को बैंक ऑफ बड़ौदा के चेस्ट से रुपये मिलते हैं। मगर एक दिन के अंतराल पर दो करोड़ रुपये मिलने से यह रुपये शहर और आसपास की शाखाओं में ही खप जा रहे हैं। जिले में बैंक की 97 शाखाएं हैं, इनमें से अधिकांश निर्जन गांव में स्थित हैं। इन शाखाओं में प्रतिदिन उमड़ने वाली भीड़ का गुस्सा अब कर्मचारी बन रहे हैं।
बड़ौदा उप्र क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के आरएम जितेंद्र कुमार ने बताया कि बैंक ऑफ बड़ौदा से प्रतिदिन दस करोड़ रुपये मांगे जा रहे हैं, अगर वह पांच करोड़ रुपये भी दें, तो हमारा काम किसी तरह चल जाए, मगर प्रत्येक दूसरे दिन दो करोड़ देते हैं, जिससे ग्राहकों की मांग पूरी नहीं हो पा रही है। इधर बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य शाखा प्रबंधक और चेस्ट प्रभारी आरआर गुप्ता ने बताया कि उनके पास इतनी धनराशि नहीं है कि वह क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक की मांग पूरी कर सकें।