मंगरौरा। खइ के पान बनारस वाला, खुलि जाइ बंद अकल का ताला। फिल्म डॉन के इस गाने ने बनारसी पान को देशभर में मशहूर कर दिया। मगर अब बनारसी को बेल्हा की माटी में उगने वाला पान टक्कर देगा। जिले में करीब 180 एकड़ में हो रही पान की खेती को रोजगार से जोड़ने व बढ़ाने की जुगत शुरू हो गई है। यहां पान की खेती करने वालों को उद्यान विभाग प्रशिक्षण देगा। इससे पान किसानों की इनकम तो बढ़ेगी ही, आंवला नगरी की धाक पान के क्षेत्र में भी जमेगी।
कई साल पहले जिले में पान की अच्छी खासी खेती होती थी, लेकिन प्रोत्साहन न मिलने से किसान धीरे-धीरे इससे दूर होते चले गए। हालांकि आज भी जिले के बेलारामपुर, लखनीपुर, सेतापुर, भिवनी, कांसापट्टी, बेसार, मरियमपुर, सलाहपुर, कुंदनपुर, सरायमधई समेत करीब 68 गांवों के किसान पान की खेती कर रहे हैं। उद्यान विभाग के सर्वे में पाया गया है कि जिले में 180 एकड़ जमीन पर अब भी पान उगाया जाता है। ज्यादातर किसान सांची व देसी पान की ख्ेाती करते हैं।
किसानों की मेहनत और लगन देख उद्यान अधिकारी ने उन्हें बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की। पान को बढ़ावा देने के लिए सर्वे रिपोर्ट के साथ शासन को पत्र लिखा। जिसे देखते हुए सरकार ने किसानों को प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया है। जिसके अमल में दो दिन उद्यान अधिकारी मंगरौरा ब्लाक क्षेत्र के उन किसानों से मिले जो पान की खेती अब भी कर रहे हैं। वहां उनके जरिए पान खान की खेती को रोजगार से जोड़ने व बढ़ावा देने की बात बताई गई। अफसरों के मुताबिक पट्टी व रानीगंज क्षेत्र में उगाए जा रहे पान को बढ़ावा दिया जाएगा। जिले में जहां भी संभव होगा वहां पान की खेती कराई जाएगी।
बनारस की पान मंडी से शुरू होगा व्यापार
उद्यान विभाग की मदद से जिले में तैयार हुए पान का व्यापार बनारस की मंडी से शुरू होगा। उद्यान विभाग के अफसरों का मानना है कि बनारस पान का हब कहलाता है। इसलिए वहां से इस पान का व्यापार किसानों को अच्छी रकम देगा।
दाम संग बढ़ रही है पान की खपत
पान अढ़तिया पारसनाथ, रामसुख, बसंतलाल, रामआसरे आदि बताते हैं कि पान की खपत संग दाम भी बढ़ रहा है। पिछले साल जो देसी पान 40 से 60 रुपये ढोली था। आज उसकी कीमत 120 से 150 रुपये तक हो गई है।
कुछ किसान यहां पान की खेती कर रहे हैं। उनकी मदद कर यहां पान की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रयास किया जा रहा है। विभाग व किसानों की मेहनत रंग लाई तो पान की खेती जिले के किसानों के लिए रोजगार का माध्यम बनेगी।
रणविजय सिंह, जिला उद्यान अधिकारी