जनपद के सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान भारत के मरीजों को भर्ती कर इलाज करने का भले ही स्वास्थ्य विभाग दावा कर रहा है, मगर हकीकत में विभाग के पास न तो विशेषज्ञ डॉक्टर हैं और न ही उपकरण। ऐसे में सरकारी अस्पतालों में आने वाले गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। सर्दी, जुुकाम और बुखार के साथ डायरिया अथवा प्रसव पीड़िताओं को भर्ती कर इलाज किया जाता है।
वर्ष 2011 में हुई आर्थिक जनगणना के आधार पर जनपद के 1 लाख 77 हजार 721 परिवारों को पात्रता सूची में शामिल किया गया। इस योजना के तहत परिवार के सभी सदस्यों के नाम गोल्डेन कार्ड जारी करने का आदेश था। एक साल बीतने के बाद भी अभी तक मात्र 88 हजार लोगों को ही गोल्डेन कार्ड जारी हो सके हैं।
दावा किया जा रहा है कि सालभर के अंदर 1996 लोगों का सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में योजना के तहत इलाज किया गया। जनपद के जिला व महिला अस्पताल के साथ ही सीएचसी बेलखरनाथ, संडवाचंद्रिका, कुंडा, अमरगढ़, बाबागंज, कोहड़ौर, लक्षमणपुर, लालगंज, पट्टी, संग्रामगढ़, गौरा, सांगीपुर, रानीगंज, बाघराय के साथ रूमा नर्सिंगहोम, शांतनु नर्सिंगहोम, संजीवनी नर्सिंगहोम, रामविलास मेमोरियल हास्पिटल कुंडा, उषा नर्सिंगहोम और रानीगंज के नारायण स्वरूप हास्पिटल में आयुष्मान भारत के तहत मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
हकीकत में देखा जाए तो जिला अस्पताल में ही हर्ट के डॉक्टर नहीं है। सीनियर फिजीशियन के भरोसे काम चलाया जा रहा है। आईसीयू तो बना है मगर चिकित्सक के अभाव में कभी मरीजों को भर्ती नहीं किया जाता है। पट्टी, लालगंज, रानीगंज और कुंडा को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर सीएचसी में सर्जन, फिजीशियन और बालरोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं की गई है।
शासन की ओर से जिन नर्सिंगहोम को आयुष्मान के मरीजों को भर्ती कर इलाज करने की जिम्मेदारी मिली है, उनमे एक दो को छोड़ दिया जाए तो वहां भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। इससे मरीजों को भर्ती कर इलाज के बजाए जिले से रेफर किया जाता है। जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में ऑपरेशन की व्यवस्था है।
लेकिन हादसे में किसी को गंभीर चोटें आ गई हैं और उसे सीटी स्कैन कराना है तो आयुष्मान भारत योजना का कार्ड उस समय काम नहीं आएगा। उसे शुल्क देकर ही जांच करानी होगी। पैर फैक्चर हो गया तो इलाज की व्यवस्था नहीं है। दरअसल राड से लेकर प्लेट तक मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ेगी।
आयुष्मान के मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। जरुरत पड़ने पर डॉक्टरों की टीम बुलवा ली जाती है। गंभीर रोगियों को जिले या फिर प्रयागराज के किसी प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करवाया जाता है। मरीज की हालत गंभीर देखकर ही रेफर किया जाता है।
डॉक्टर अरविंद कुमार श्रीवास्तव, सीएमओ।