सोशल मीडिया पर अमरगढ़ में तैनात रहे नेत्र परीक्षण अधिकारी और सीएमओ कार्यालय के लेखा अधिकारी का ऑडियो वायरल हो रहा है। नेत्र परीक्षण अधिकारी यह कह रहा है कि दो लाख देने के बाद भी 11 महीने का वेतन नहीं जारी किया गया। सीएमओ चले भी गए। वहीं लेखा अधिकारी ने इस ऑडियो को फर्जी बताया। उन्होंने कहा कि यह दो साल पुराना है।
अमरगढ़ सीएचसी में नेत्र परीक्षण अधिकारी रहे राममूर्ति यादव का दो साल पहले मानदेय पूर्व सीएमओ डॉ. एके श्रीवास्तव ने रोक दिया था। आरोप है कि 11 महीने का मानदेय जारी कराने के लिए उसने वित्त लेखाधिकारी सुनील श्रीवास्तव को दो लाख रुपये दिए थे। इसके बाद भी उसका काम नहीं हुआ। जबकि सीएमओ का तबादला हो गया।
नेत्र परीक्षण अधिकारी ने वित्त लेखाधिकारी से फोन पर बात की और ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इस मामले में वित्त लेखाधिकारी का कहना है कि वेतन का भुगतान अमरगढ़ सीएचसी से होता है। मेरा इसमें कोई योगदान नहीं हैं। मुझे फंसाने के लिए फर्जी तरीके से दो साल पुराना ऑडियो वायरल किया जा रहा है। जबकि दो साल पहले ही नेत्र परीक्षण अधिकारी के वेतन का भुगतान हो चुका है। उसका गैर जनपद तबादला भी हो गया है।
तत्कालीन सीएमओ डॉ. जीएम शुक्ल ने कहा कि वर्ष 2022 में मैंने वेतन भुगतान कर दिया था। उस समय पैसे के लेनदेन की बात मेरे संज्ञान में नहीं आई थी। जिस कर्मचारी का ऑडियो वायरल हो रहा है, उसका वेतन जारी करने के कुछ ही दिनों बाद गैर जनपद तबादला हो गया। इस ऑडियो के बारे में मुझे नहीं पता है। वित्त लेखाधिकारी सुनील कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि नेत्र परीक्षण अधिकारी ने दो साल पहले आरोप लगाया था। इस मामले में जांच बैठी थी। जांच में मामला फर्जी पाया गया था। मुझे क्लीन चिट मिल चुकी है।