छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों से हुई मुठभेड़ में बेल्हा का एक लाल शहीद हो गया। इस बात की खबर घर पहुंची तो कोहराम मच गया। आसपास के लोग संवेदना जताने के लिए पहुंचने लगे।
जनपद के कोहड़ौर थाना क्षेत्र के धरौली मधुपुर निवासी सतीशचन्द्र वर्मा (38) पुत्र रामराज 17 साल पहले सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। मौजूदा समय में उनकी तैनाती छत्तीसगढ़ के सुकमा इलाके में थी। यहां शनिवार को नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में उनको गोली लग गई। जिससे उनकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि मुठभेड़ में कई सैनिकों की मौत हो गई। शनिवार को जब इस बात की खबर घर पहुंची तो कोहराम मच गया। छह भाइयों में पांचवें नंबर पर रहे सतीश के शहीद होने की खबर मिलने पर परिजनों में कोहराम मच गया। घर पर रहीं माता केवला देवी और पिता रामराज की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। वहीं मायके गई पत्नी योगिता और बेटी श्रुति (8)और बेटे शौरभ (6) का भी रो-रो कर बुरा हाल था। सूचना मिलने पर कोहड़ौर एसओ मौके पर पहुंचे।
चार मार्च को परिजनों से मिलकर गए थे सतीश
रिश्तेदारी में पड़े एक शुभ कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सतीश 17 फरवरी को घर आए थे। चार मार्च को ही वह घर से ड्यूटी के लिए निकले थे। परिजनों से जून में फिर लौटकर आने की बात भी कही थी, मगर ईश्वर को शायद यह मंजूर नहीं था। यह कहकर पत्नी और बच्चों के साथ उनके माता-पिता रोते रहे।
डेढ़ वर्ष पहले उसी स्थान पर विस्फोट में बचे थे
छत्तीसगढ़ के सुकमा में डेढ़ वर्ष पहले भी सतीशचन्द्र वर्मा की तैनाती हुई थी। उस दौरान बम विस्फोट में वह बाल-बाल बच गए थे। इससे परिजन सहम गए थे। वह अपना ट्रांसफर दिल्ली करवा लिए थे। बीच में फिर उसी स्थान पर तैनाती मिल गई। इसके बाद भी सतीश ने हिम्मत नहीं हारी और उसी स्थान पर नक्सलियों से लड़ाई लडने के लिए पहुंच गए। आखिरकर शनिवार को नक्सलियों के हमला में उन्हें अपनी जान गवानी पड़ी।