जनपद के जामा मस्जिदों में शुक्रवार को जुमे की नमाज के पहले खुतबे में अलविदा-अलविदा या सहरी रमजान की आवाज इमाम ने बुलंद की। अकीदत के साथ शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों में आखिरी जुमे की नमाज अदा की गई। मस्जिदों में उलेमा इकराम ने रब चाही जिंदगी से ही आखिरत की जिंदगी संवरने की बात बताई।
पाक रमजान माह के आखिरी जुमे को अलविदा की नमाज बड़े ही एहतेराम के साथ अदा की गई। जामा मस्जिदों के अलावा अन्य मस्जिदों में भी नमाज हुई। मस्जिदों के बाहर पहले से सुरक्षा व्यवस्था का मुकम्मल बंदोबस्त किया गया था। शहर से लेकर गांव की मस्जिदों में सफाईकर्मी तैनात थे। इसके पूर्व बड़ों के साथ बच्चे भी नए लिबास में समय से पहले मस्जिदों में पहुंचे। जुमे की नमाज के पहले सिप्तैन रोड स्थित जामा मस्जिद में मौलाना अब्दुल हादी ने अपनी तकरीर में कहा कि रब चाही जिंदगी के लिए लोगों को अपनी नफ्स (इच्छाओं) पर काबू करना होगा। पांच वक्त की नमाज के साथ ही सच्चाई की राह पर चलना होगा।
ईमान की कसौटी पर खरा उतरने वाले इंसान की ही आखिरत की जिंदगी संवरेगी। इसके लिए सभी को अल्लाह के बताए रास्ते पर चलना होगा। साल में रमजान का महीना आता है। खुदा के हुक्म को पूरा करने के लिए हर उम्र के लोग अपनी इच्छाओं पर काबू करते हुए रोजा रखते हैं। सभी को सच्चाई की राह पर चलना होगा। जामा मस्जिद में पेश इमाम मौलाना अब्दुल रईस, चांद तारा मस्जिद में मौलाना इस्तियाक, शेखजी मस्जिद में मौलाना फखरुज्जमा, खुशखुशवापुर में मौलाना रियाज अहमद, गुलशने मदीना मस्जिद में मौलाना समीउल्ला ने जुमा अलविदा की नमाज अदा कराई।