किसानों को धान की रोपाई करने के लिए खाद नहीं मिल रही है। जिले की 19 समितियों पर अभी तक खाद नहीं पहुंचने से किसान मजबूरी में खुले बाजार से खरीद रहे हैं। असर यह है कि पर्याप्त मात्रा में खाद की उपलब्धता नहीं होने से संकट गहरा गया है। खरीफ की मुख्य फसल धान की खेती के लिए किसानों को यूरिया और डीएपी की आवश्यकता होती है। साधन सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों तक पहुंचने वाली खाद इस वर्ष 19 समितियों पर खाद को टोटा है। इसके पीछे की वजह बीते माह समितियों पर तैनात सचिवों के हड़ताल पर रहना है। इन समितियों के सचिवों ने अभी तक पीसीएफ से खाद का उठान करने के लिए चेक नहीं जमा किया है। इसलिए खाद का उठान नहीं हो रहा है। खरीफ के सीजन में यूरिया का लक्ष्य 16,134 मीट्रिकटन, डीएपी 2155 मीट्रिकटन और एनपीके 61 मीट्रिकटन तय किया गया है। जिले की पीसीएफ गोदाम में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है, मगर समितियों से चेक नहीं मिलने के कारण खाद नहीं भेजी जा रही है। जिला प्रशासन ने अगर साधन सहकारी समितियों पर खाद पहुंचाने में तेजी नहीं दिखाई तो किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।