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वकील की हत्या के बाद बवाल, तालाबंदी

Sat, 31 Oct 2015 02:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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प्रतापगढ़। अधिवक्ता इंद्रमणि शुक्ला की हत्या के बाद रात में ही आक्रोशित वकीलों ने अस्पताल में बवाल कर दिया। चौकी प्रभारी को पीटने के साथ ही अस्पताल परिसर में तैनात की गई पुलिस फोर्स व पीएसी को बाहर कर दिया। अधिकारियों को भी खरीखोटी सुनाई। शुक्रवार को कचहरी में तालाबंदी कर विरोध प्रदर्शन किया। आरएएफ समेत कई थानों की पुलिस आने के बाद हंगामा शांत हुआ। उधर, इंद्रमणि की पत्नी की तहरीर पर चार अज्ञात बदमाशों के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है।
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नगर कोतवाली के बड़नपुर निवासी जूबाए के कोषाध्यक्ष इंद्रमणि शुक्ला को गुरुवार की रात कार में गोली मार दी गई थी। माथे व कंधे पर गोली लगने से उनकी मौत हो गई थी। इस बात की खबर मिलते ही सैकड़ों वकील देर रात जिला अस्पताल पहुंच गए। मौके पर पहुंचे डीएम- एसपी से भी अधिवक्ताओं की तकरार हुई। बवाल की आशंका को देखते हुए भारी भरकम पुलिस फोर्स अस्पताल में तैनात कर दी गई। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें वकील पुलिस के रवैये से खफा थे। रात में सिविल लाइन चौकी प्रभारी उदय त्रिपाठी को कुछ लोगों ने अस्पताल में पीट दिया। इसके बाद काफी देर तक हंगामा चलता रहा। पुलिस फोर्स को अस्पताल परिसर से बाहर कर दिया गया। केवल सीओ सिटी मनीष मिश्र ही अस्पताल में देर रात तक डटे रहे। इस बीच रैपिड एक्शन फोर्स भी अस्पताल के गेट पर पहुंच गई। पत्नी कंचन शुक्ला की तहरीर पर पुलिस ने चार अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। शुक्रवार की सुबह कचहरी पहुंचे वकीलों ने तालाबंदी कर दी।

 इसके बाद बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंचे। वे मृत अधिवक्ता के परिजनों को बीस लाख मुआवजा, पत्नी को नौकरी के साथ ही हत्या करने वालों की गिरफ्तारी संग घटना का खुलासा करने की मांग करने लगे। जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार सक्सेना ने सभी की बात सुनी और उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया। इसी दौरान डीआईजी भगवान स्वरूप भी वकीलों के बीच पहुंचे। उन्हें भी अधिवक्ताओं के गुस्से का सामना करना पड़ा। हालांकि उन्होंने सभी की बातें सुनने के बाद भरोसा दिलाया कि एसपी की अगुवाई में घटना का सही खुलासा होगा। अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए भी कदम उठाया जा रहा है। पोस्टमार्टम के बाद शव बड़नपुर घर लाया गया। वहां से परिजन शव का अंतिम संस्कार करने के लिए इलाहाबाद रवाना हो गए।
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अधिवक्ता की हत्या करने वालों की खोजबीन के लिए पांच टीमें लगाई गई हैं। जल्द हत्या का सही खुलासा होगा। अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
सुनील कुमार सक्सेना, पुलिस अधीक्षक

प्रतापगढ़। साथी की हत्या के बाद आक्रोशित अधिवक्ता शुक्रवार दोपहर सड़क पर उतर गए। कचहरी से लेकर जिला अस्पताल तक वकीलों ने जुलूस निकालकर नारेबाजी की। पुलिस केवल पीछे- पीछे चलती रही।
अधिवक्ता इंद्रमणि शुक्ला की हत्या की खबर मिलने के बाद से वकीलों में आक्रोश पनप उठा था। शुक्रवार को कचहरी पहुंचे वकील गुस्से में थे। दोपहर में कचहरी से एक जुलूस अध्यक्ष भूपेंद्रनाथ शुक्ला की अगुवाई में जिला अस्पताल की ओर नारेबाजी करते हुए निकला।

 वे पुलिस प्रशासन का जोरदार विरोध कर रहे थे। जुलूस के पीछे-पीछे पुलिस भी चल रही थी। वकीलों के आक्रोश को देखते हुए पूरा शहर पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। जिले के अधिकांश थानेदारों को अस्पताल से लेकर कचहरी तक मुस्तैद कर दिया गया था। पुलिस लाइन गेट पर आरएएफ तैनात की गई थी। कोषागार चौराहा, अंबेडकर चौराहा, पुलिस लाइन तिराहा, कचहरी गेट, राजापाल टंकी चौराहे पर भी भारी भरकम पुलिस लगी थी। वकीलों का जुलूस और शहर में पुलिस ही पुलिस देख राहगीर भी सहम उठे। अस्पताल में संतोष पांडेय, गिरीशचंद्र मिश्र, रजनीकांत मिश्र, विवेक शुक्ला, संतोष तिवारी, हरिओम पांडेय, विजय त्रिपाठी, आद्या प्रसाद सिंह, गणेश मिश्र, राजेंद्र सिंह, पुष्पराज सिंह, निर्भय , मुक्कू ओझा, आरिफ खान, अभिषेक तिवारी, धीरज ओझा, नीरज तिवारी, सलीम समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

जिला पंचायत का लड़ा था चुनाव
प्रतापगढ़। जूबाए के कोषाध्यक्ष इंद्रमणि शुक्ला जिला पंचायत सदर तृतीय से चुनाव लड़े थे। उनके करीबी दोस्त जय प्रकाश मिश्र ने बताया कि दो दिन पहले उन्होंने कहा था कि वह तो चुनाव हार चुके हैं। अब मतगणना अभिकर्ता बनाने से क्या होने वाला है। यह बात कहते हुए शुक्रवार को जेपी फफक पड़े।

प्रतापगढ़। जब चाहो जिसे गोली मार दो और भाग जाओ। बदमाश आजकल जिले में इसी तर्ज पर काम कर रहे हैें। उनके अंदर खाकी का जरा भी भय नहीं रह गया है। लगातार हो रही घटनाओं से बेल्हा में पुलिस का इकबाल खत्म हो गया है। अपराधी घटना को अंजाम देने के बाद भाग निकलते हैं और पुलिस केवल जांच करने तक ही सिमट कर रही गई है।

जिले में दस दिन के भीतर गनशॉट की कई घटनाएं हो गई हैं। इससे पुलिस का इकबाल खत्म होता दिखाई पड़ता है। अंतू में अमेठी के विक्रांत की गोली मारकर हत्या के बाद तो जैसे जिले में गोली मारने की घटनाओं की बाढ़ सी आ गई है। ऐसा लग रहा है कि बदमाश जब चाहते हैं, जिसे चाहते हैं गोली मारकर भाग जाते हैं। सूचना मिलने के बाद भी पुलिस कुछ नहीं कर पाती। आसपुर देवसरा में सर्राफ को गोली मारने के बाद बदमाशों ने शुकुलपुर में कलेक्ट्रेटकर्मी रामआसरे शर्मा और उसके पड़ोसी कमलेश को गोली मारी। बेल्हा देवी मंदिर के करीब दुकानदार रवींद्र गुप्ता को गोली मारी गई। अधिवक्ता इंद्रमणि शुक्ला की गुरुवार को हत्या करने के बाद भी यह सिलसिला नहीं रुका। शुक्रवार को घर के करीब ही रानीगंज के रामपुर जरियारी में दलित युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इन घटनाओं पर नजर डालने से ऐसा प्रतीत होता है कि बेखौफ बदमाशों के आगे पुलिस घुटने टेक चुकी है।

भाड़े के शूटरों ने लगाया सटीक निशाना
प्रतापगढ़। अधिवक्ता इंद्रमणि शुक्ला को फुलविरया के करीब गोली मारने वाले अपराधी बेहद शातिर थे। वे लोगों को मौत के घाट उतारने के फन में पूरी तरह माहिर थे। तभी तो वकील को पिस्टल माथे पर सटाकर ऐसी मारी कि वह टस से मस नहीं हो सके।जिला अस्पताल से लेकर कचहरी तक इसी बात की चर्चा रही। किसी रंजिश रखने वाले ने भाड़े के हत्यारों को सुपारी देकर इंद्रमणि की हत्या कराई। तर्क दे रहे थे कि इतना अचूक निशाना दूसरा कोई नहीं लगा सकता। कार में बैठे इंद्रमणि के माथे पर एक गोली और दूसरी गोली कंधे के नीचे लगी। हत्यारे यह जानते थे कि कहां गोली मारने से सामने वाला जिंदा नहीं बच सकता। माथे में मारी गई गोली पीछे सिर से निकल गई थी। दूसरी गोली कंधे के बीच में ही फंसी रह गई थी। डा: करमचंद्र, संदीप सक्सेना और डा. अनिल गुप्ता ने वीडियोग्राफी के बीच शव का पोस्टमार्टम किया। अस्पताल में अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी दिनेश सिंह की अगुवाई में पुलिस बल तैनात था।

प्रतापगढ़। पंचायत चुनाव करा रहे पुलिस अधीक्षक के हाथ आदर्श आचार संहिता ने बांध रखे हैं। इससे एसपी पशोपेश में हैं। चुनाव के चलते थानेदार मनमानी पर उतर आए हैं। एक सप्ताह के भीतर शहर में लगातार हुई घटनाओं को लेकर लोग नगर कोतवाल और सीओ सिटी की कार्यप्रणाली पर उंगली उठा रहे हैं। लोगों का आरोप है कि थानेदार मनमाने ढंग से काम कर रहे हैं तो सीओ सिटी दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं।

पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार सक्सेना हर छोटी बड़ी घटनाओं पर पैनी निगाह रखते हैं। मातहतों को तहकीकात करते हुए असली दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश देने के साथ ही कानून व्यवस्था का पालन कराने और पब्लिक से सौहार्दपूर्ण संबंध रखने की बात कहते हैं। उनकी तैनाती के कुछ दिनों बाद ही आदर्श आचार संहिता लग गई। इससे थानेदार अपनी कुर्सी पक्की मानकर चल रहे हैं। एसपी के आदेश को भी वे तवज्जो देते नहीं दिखाई पड़ रहे। अंतू में अमेठी के युवक की हत्या हो या आसपुर देवसरा में सर्राफ को गोली मारने की घटना। एसपी ने क्राइम ब्रांच संग इलाके की पुलिस को साफ निर्देश दिया कि घटना का जल्द से जल्द सही खुलासा होना चाहिए। दोनों थानेदार खुलासा तो दूर एक कदम भी नहीं चल सके। इसके अलावा भी अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश को थानेदार गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। थानेदारों के मनमानेपन से एसपी पशोपेश में दिखाई पड़ रहे हैं। आदर्श आचार संहिता समाप्त होने के बाद मनमानी पर उतारू थानेदारों पर गाज गिर सकती है।

डीआईजी, एसपी करते रहे फ्लैग मार्च
डीआईजी भगवान स्वरूप और पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार सक्सेना भारी भरकम पुलिस बल के साथ शहर का चक्रमण करते रहे। राजापाल चौराहे से लेकर पुलिस लाइन अंबेडकर चौराहा, कोषागार चौराहा तक पुलिस अधिकारियों ने ऐसी नाकेबंदी की थी कि कोई भी बाइक सवार पैदल नहीं प्रवेश कर पा रहा था। दूसरे जनपदों से आई आरएएफ भी भ्रमण करती रही। डीआईजी, एसपी बराबर मातहतों से जानकारी लेते रहे। एएसपी पूर्वी अखिलेश्वर पांडेय अस्पताल परिसर में तो नजर नहीं आए, लेकिन कचहरी के इर्द-गिर्द भ्रमण कर जानकारी ली। वहीं एएसपी पश्चिमी दिनेश सिंह अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था के लिए भागदौड़ करते रहे। पुलिस अधिकारियों की मंशा थी कि ऐसे चौराहों से वाहनों का प्रवेश रोकने पर जाम लगाने की मंशा विफल हो जाएगी।

रूट डायवर्ट होने से लग गया जाम
शहर के वाहनों के रूट में अचानक परिवर्तन करने से कई सड़कों पर जाम लग गया। अंबेडकर चौराहे से बाइक भी घुसने नहीं दी जा रहीं थी। यही हाल भंगवाचुंगी की ओर का भी था। इससे जगह- जगह जाम के हालात पैदा होते रहे। यातायात पुलिस जाम में फंसे लोगों के लिए पसीना बहाती रही।

कार में ही रखी रह गई करवाचौथ व्रत की सामग्री
कटरामेदनीगंज। अधिवक्ता इंद्रमणि शुक्ला ने गुरुवार की शाम करीब साढ़े छह बजे अपनी पत्नी को फोन कर करवा चौथ के व्रत के लिए सामग्री की जानकारी ली। पत्नी कंचन ने जो सामान बताए, उसकी खरीदारी करने के बाद उसे कार में रख लिया। हालांकि शुक्रवार को वह पल नसीब नहीं हो सका। कार में व्रत की सामग्री देख पत्नी कंचन बिलखती रही।

कार में मिला 315 बोर का तमंचा
अधिवक्ता इंद्रमणि शुक्ला की कार में एक तमंचा भी मिला है। पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार सक्सेना ने बताया कि कार में तलाशी के दौरान एक 315 बोर का तमंचा मिला है। उसे कब्जे में लेकर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। ताकि तमंचे के बारे में छानबीन की जा सके।

मां हो गई बेहोश, पत्नी रही बेसुध
अधिवक्ता इंद्रमणि शुक्ला के हत्या की खबर पाकर मां भगौती देवी मर्चरी पहुंची। बेटे का शव देखते ही वह रोते हुए बेहोश हो गई। पत्नी कंचन भी बेसुध हो जा रही थीं। महिला एसओ दुर्गावती उन्हें संभालने में लगी रहीं। नि:शक्त भाई चंद्रमणि शुक्ल का रो- रोकर बुरा हाल रहा। दूसरा भाई सूर्यमणि शुक्ला सीतापुर में आरक्षी के पद पर तैनात है। उसके आने के बाद ही पंचायतनामा भरा जा सका। सूर्यमणि को देख परिवार के लोग करुण क्रंदन करने लगे। इससे माहौल गमगीन हो गया। परिवार के लोगों की मानें तो इंद्रमणि ने वर्ष 2005 में दूसरा विवाह किया था। पहली पत्नी से एक बेटी है, लेकिन अब वह साथ नहीं रहती थी।

जेल से तो नहीं रची गई वकील की हत्या की साजिश
प्रतापगढ़। अधिवक्ता इंद्रमणि शुक्ला की हत्या को लेकर शुक्रवार को चर्चाओं का बाजार गर्म रहा। कोई जेल में बंद शातिरों की तो कोई अचलपुर से हत्या के तार जुड़े होने की चर्चा करने में मशगूल था।
वकील इंद्रमणि शुक्ला की हत्या के बाद घटना की वजह जानने के लिए हर कोई परेशान था। इंद्रमणि शुक्ला की हत्या की वजह को लेकर दिन भर चर्चाएं होती रहीं। चर्चा रही कि जेल से उनकी हत्या की साजिश रची गई और शूटरोें को सुपारी दी गई। कोई कहता कि अचलपुर के एक मामले में इंद्रमणि ने जमकर पैरवी की थी। इससे खार खाए लोग भी इस तरह की घटना को अंजाम दिला सकते हैं। किसी जमानत को लेकर भी तकरार की बात लोगों के सामने आ रही थी। हालांकि पुलिस हर बिंदुओं पर गहनता से छानबीन के साथ ठोस साक्ष्य संकलित करने के लिए हाथ पैर मारती रही। एलआईयू के लोग भी लोगों की चर्चाओं पर अपनी मुहर लगाते रहे, लेकिन वे खुलकर कुछ भी बताने से इनकार करते रहे।
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