मां के पेट में नौ महीने रहने के दौरान उसने दुनिया में आने का ख्वाब देखा, ढेर सारी रंग बिरंगी कहानियां सुनीं, इस खूबसूरत सफर में उसने बहुत से ख्वाब संजोए। उसका ख्वाब था कि जब वो अपने नन्हें-नन्हें पांव पहली बार जमीं पर रखे तो मां-पापा खुशी से पागल हो जाएं। वो खूबसूरत पल आया भी। नवजात ने इस दुनिया में कदम भी रखा पर न सोहर गाए गए और न ही कोई खुशी झलकी। शहर महिला अस्पताल के सामने स्थित तालाब किनारे नवजात को फेंक दिया गया। जहां उसकी मौत हो गई।
जिला महिला अस्पताल के पुराने मुख्यद्वार के पास बड़ा सा तालाब है। शुक्रवार सुबह करीब नौ बजे तालाब किनारे एक युवक पहुंचा। उसने देखा कि तालाब किनारे नवजात पड़ा है। उसे यह नहीं पता था कि नवजात की सांसें टूट चुकी हैं। युवक ने आसपास के दुकानदारों को इस बारे में बताया।
थोड़ी देर में देखते-देखते ही देखते वहां मजमा लग गया। किसी ने इसकी सूचना पुलिस को दे दी। पुलिस मौके पर पहुंची और नवजात को लेकर अस्पताल पहुंची। यहां चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लिया।
इनसेट-
बेरोकटोक चल रहा गर्भपात का खेल
सीएमओ के नाक के नीचे कई ऐसे क्लीनिक और नर्सिंग होम संचालक हैं, जो गर्भपात कराकर मोटी रकम कमा रहे हैं। जब जांच की बारी आती है तो वे अपनी व्यवस्था से अफसरों की जेब गर्म कर उनका भी मुंह बंद करा देते हैं।
राजा प्रताप बहादुर चिकित्सालय के आसपास कई ऐसे अवैध रूप से क्लीनिक का संचालन हो रहा है जहां ऐसी ही महिलाओं को भर्ती किया जाता है, जो गर्भ में पल रहे नवजात जन्म नहीं देना चाहती हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक आठ से दस हजार रुपये लेकर क्लीनिक और नर्सिग होम संचालक गर्भपात कराते हैं। ऐसा कई बार हो चुका है। मगर अफसर किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं।
वर्जन
तालाब किनारे नवजात का शव मिला है। इसकी जानकारी हुई है। अपर शोध अधिकारी के साथ डिप्टी सीएमओ डॉ. एस हैदर को पूरे मामले की जांच कर तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया है।
डॉ. जीएम शुक्ल, सीएमओ।
........
एसआरएन अस्पताल प्रयागराज में खुला है केंद्र
लोकलाज कहें या कुछ और लेकिन ऐसे मामलो में परित्यक्त कर दिए गए बच्चों की परवरिश के लिए स्वरूपरानी मेडिकल कॉलेज प्रयागराज में एक केंद्र खोला गया है। जिसमें किसी प्रकार की लिखापढ़ी या पहचान नहीं मांगी जाती। किसी को भी कहीं नवजात पड़ा हुआ मिलता है तो 24 घंटे में किसी भी वक्त वहां पहुंच कर बच्चे को छोड़कर आ सकता है। बच्चा लाने वाले की गोपनीयता बनी रहे, इसलिए वहां कोई स्टाफ सामने मौजूद नहीं रहता। आप बच्चे को रख दें, और आपके जाते ही कैमरे से निगरानी कर रही चिकित्सकों की टीम बच्चे को उठा लेगी और उनकी पूरी देखरेख करेगी।