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कड़ी सुरक्षा में हुआ अधिवक्ता संघ का चुनाव

Thu, 22 Jan 2015 10:14 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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संयुक्त अधिवक्ता संघ का चुनाव गुरुवार को गहमा-गहमी के बीच कड़ी सुरक्षा के बीच सम्पन्न हुआ। 349 मतदाताओं ने अध्यक्ष व महामंत्री समेत सात पदों के लिए वोट डाले। शाम तक मतदान के लिए वकीलों की कतार लगी रही।  
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माह भर से तहसील व दीवानी में संयुक्त अधिवक्ता संघ के चुनाव को लेकर चल रही गहमागहमी गुरुवार को मतदान के साथ खत्म हो गई। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कुल 356 में से 349 मतदाताओं ने अपने मताधिकारी का प्रयोग किया। चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए छह, उपाध्यक्ष पद के लिए तीन व महामंत्री, कोषाध्यक्ष, सहमंत्री, आय व्यय निरीक्षक पद पर दो-दो प्रत्याशी  किस्मत आजमा रहे हैं।

 सदस्य कार्यकारिणी के चार पदों के लिए पांच प्रत्याशी मैदान में हैं। गुरुवार क ो सुबह साढे़ नौ बजे से तीन बजे तक वोट डालने का समय निर्धारित किया गया था। मगर दोपहर बाद अचानक मतदाताओं  संख्या अधिक होने से कतार लग गई और शाम तक मतदान चलता रहा। कई दिनों से प्रत्याशियों के बीच आरोप प्रत्यारोप व तहसील में गहमा-गहमी देख सुरक्षा व्यवस्था के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे। उपजिलाधिकारी इंद्रासन वर्मा, सीओ सीताराम, लालगंज, संग्रामगढ़, सांगीपुर के थानाध्यक्ष समेत एक कंपनी पीएसी के जवान दिन भर मुस्तैद रहे। मतदान कराने को लेकर चुनाव समिति के  अध्यक्ष मनोज सिंह, देवी प्रसाद मिश्र, ओंकार नाथ क्रांतिकारी, संजय सिंह, प्रदीप सिंह, धीरेंद्र मिश्रा, बृजेंद्र पांडेय, करुणाशंकर मिश्रा, विनोद मिश्रा, ज्ञानप्रकाश शुक्ल, घनश्याम संवरिया, घनश्याम सरोज भी हलाकान रहे।  
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संयुक्त अधिवक्ता संघ के चुनाव के  चलते तहसील में कामकाज नहीं हो सका। यहां प्रतिदिन की भांति फरियादी तो आए लेकिन छावनी में तब्दील तहसील परिसर और प्रत्याशियों तथा समर्थकों की गहमा-गहमी देख वे गेट से ही लौट गए। कुछ देर तक तहसील के  अधिकारी व कर्मचारी अपने कमरों में जरूर बैठे पर शोर शराबा व चारों ओर अधिवक्ताओं का कब्जा देख वे   बाहर जाने में ही अपनी भलाई समझे।

अधिवक्ता संघ के चुनाव में सदस्य कार्यकारिणी पद के लिए चुनावी मैदान में उतरे रामलखन शर्मा ने खुद को वोट नहीं देने की अपील कर सबको हैरत में डाल दिया। रामलखन ने मतदान केंद्र के दरवाजे पर पंपलेट चिपकाकर उन्हें वोट नहीं देने की अपील तो की ही साथ ही दिन भर मतदाताओं से मिलकर भी वोट नहीं देने की बात करते रहे। उनका यह कारनामा तहसील में चर्चा का विषय बना रहा। उनका कहना है कि उनके न चाहते हुए भी साथियों ने उनका नामांकन पत्र दाखिल कर दिया था।
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