फोटो 00नवमी तिथि पर हवन-पूजन के दौरान इस बार ग्रहोें की अड़चन नहीं रहेगी। व्रतधारी दिनभर हवन-पूजन कर सकते हैं। दरअसल, इस बार नवमी तिथि पर पुष्य नक्षत्र है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इससे लोगों को पूजन- अर्चन में परेशान नहीं होना पडे़गा।
नवरात्र का अंतिम चरण चल रहा है। इस बार एक भी तिथि की हानि नहीं है। कोरोना की वजह से इस बार देवी मंदिरों के पट बंद हैं। लोग अपने-अपने घरों में कलश स्थापना कर पूजन-अर्चन कर रहे हैं।
गुरुवार को नवमी तिथि है। आमतौर पर नवमी तिथि पर हवन- पूजन के दौरान ग्रहों का संयोग ठीक नहीं बैठता था। पूजन- अर्चन के लिए अच्छे योग का संयोग कम ही समय के लिए मिल पाता। समय के अभाव में लोग परेशान होते। मगर इस बार नवमी तिथि पर दिनभर पूजन-हवन का संयोग है।
ज्योतिषाचार्य पं. आलोक मिश्र ने बताया कि बुधवार को रात नौ बजे नवमी तिथि की शुरुआत हो जाएगी। भोर में हवन पूजन का क्रम शुरू हो जाएगा, जो दिनभर चलेगा। रात नौ बजे के बाद नवमी तिथि समाप्त होगी। खास बात यह है कि इस बार पुष्य नक्षत्र है। दिनभर ग्रहोें का अच्छा संयेाग है। किसी तरह ग्रहों की अड़चन नहीं है।
क्या है हवन का महात्म्य
ज्योतिषाचार्य पंडित आलोक मिश्र ने बताया कि यज्ञ एवं व्रत का समापन होता है। इनके माध्यम से अनुष्ठान फल प्राप्त होता है। हवन करने से वातावरण की शुद्धि एवं वातावरण में विद्यमान संक्रामक जीवाणु एवं विषाणु नष्ट हो जाते हैं।
कब करें पारण
ज्योतिषाचार्य पं. आलोक मिश्र ने बताया कि निर्णय सिंधु के अनुसार ऐसा मत है नवरात्र व्रत का पारण नवमी का अंतिम चरण और दशमी के प्रथम चरण के बीच में होना चाहिए। ऐसे में नवरात्र व्रत का पारण गुरुवार को ही रात नौ बजे से शुरू होगा। शुक्रवार को प्रात:काल तक चलेगा।