लॉकडाउन के दौरान जाबकार्डधारकों, श्रमिकों, उज्ज्वला गैस के लाभार्थियों और जनधन योजना के तहत जिले के 6.23 लाख लाभार्थियों के खाते में 46.11 करोड़ रुपये आए हैं, मगर इस धनराशि को लाभार्थी नहीं निकाल पा रहे हैं। इसकी वजह यह है कि गांव के अधिकांश खाताधारकों ने लंबे समय से लेनदेन नहीं किया था। इससे बैंक में अब केवाईसी मांगा जा रहा है। बगैर केवाईसी के भुगतान नहीं किया जा रहा है। बैंकों में रुपये निकालने वालों की संख्या इतनी अधिक है कि कर्मचारी केवाईसी को अपडेट नहीं कर पा रहे हैं। इससे लाभार्थियों को भटकना पड़ रहा है।
लॉकडाउन के दौरान आर्थिक तंगी से निपटने के लिए जिले के 6.23 लाख खाताधारकों के खाते में 46.11 करोड़ रुपये आए हैं। इसमें उज्ज्वला गैस योजना के 2,16,572 उपभोक्ताओं के खातों में 795-795 रुपये, जनधन योजना के 1.70 लाख खातों में पांच-पांच सौ रुपये, 72,569 जॉबकार्डधारक और 7485 श्रमिक मजदूरों के खाते में एक-एक हजार रुपये, डेढ़ लाख दिव्यांग, विधवा, वृद्धा और किसान पेंशनरों को तीन-तीन माह की पेंशन दी गई है। खाते में राहत राशि आने के बाद लाभार्थियों की खुशियां उस समय काफूर हो गईं जब यह पता चला कि बगैर केवाईसी के रुपये नहीं मिलेंगे। इधर बैंकों में इतनी भीड़ उमड़ रही है कि कर्मचारी केवाईसी अपडेट नहीं कर रहे हैं। इससे लाभार्थियों की परेशानी बढ़ गई है।
जिले की टाइनी शाखाओं से दस हजार रुपये आधार नंबर डालकर और अंगूठा लगाने पर मिल जाता है। मगर केवाईसी जमा करने के लिए खाताधारक को बैंक ही जाना पड़ता है। बैंक से खाता अपडेट होने के बाद ही रुपये निकाल सकते हैं।
बैंक में खाता खुलवाने वाले उन ग्राहकों को केवाईसी देना पड़ता है, जो तीन साल तक खाते का संचालन नहीं करते हैं। गांव के अधिकांश लोग ऐेसे हैं जिन्होंने खाता खुलवाने के बाद मुड़कर नहीं देखा। इसके चलते अधिकांश खातों पर रोक लगी हुई है।