सुरक्षित यातायात और समय बचाने के लिए बने हाइवे अब हादसों का दूसरा नाम बन गए हैं। चौड़ी सड़कों पर वाहनों की रफ्तार तो बढ़ी है लेकिन सुरक्षा के मानकों की अनदेखी से हादसे भी बढ़ते जा रहे हैं।
अंधे मोड़, ट्रकों के पीछे लाइट की सही से व्यवस्था न होने और ओवर टेकिंग में लापरवाही के कारण वर्ष भर में हाइवे पर सैकड़ों लोगों की जान चली गई। महंगी और सुरक्षा के तामझाम से लैस गाड़ियां भी हाइवे पर धोखा दे जा रही हैं। जिन गाड़ियों को सुरक्षित कहा जाता है, उसमें सफर करने वाले भी बच नहीं पा रहे हैं।
30 दिन के भीतर हुए हादसों में सेफ कही जाने वाली गाड़ियों में सफर करने वाले पूर्व महाधिवक्ता समेत इलाहाबाद की जानी मानी चार हस्तियों और उनके परिजन जान गंवा चुके हैं। महाधिवक्ता टाटा सफारी से थे। अहम यह है कि तीन हादसे इलाहाबाद और रायबरेली के बीच हुए।
जिस टाटा सफारी में पूर्व महाधिवक्ता एसएमए काजमी सफर कर रहे थे, उसे काफी सुरक्षित माना जाता है। ड्राइवर साबिर के मुताबिक अगली सीट पर शमीम था।
उसने और शमीम ने सीट बेल्ट बांध रखी थी लेकिन दुर्घटना में यह काम नहीं आई। दोनों गंभीर रूप से जख्मी हो गए। ड्राइवर यह नहीं बता सका कि पिछली सीट पर बैठे एसएमए काजमी और उनके दामाद के भाई ने सीट बेल्ट लगाई थी या नहीं। बेहद सुरक्षित और आरामदेह समझी जाने वाली टोयटा की फारच्युनर में सफर करने वाले पूर्व महापौर रविभूषण वधावन की भी हाइवे जान ले चुका है।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष कंदर्प नारायण मिश्रा और उत्तर मध्य रेलवे इंप्लाइज संघ के जनरल सेक्रेटरी आरपी सिंह के बेटे अभिषेक भी लखनऊ मार्ग पर हाइवे पर हुए हादसे का शिकार हुए।
बिना डिवाइडर का हाइवे, हादसे को न्यौता
इलाहाबाद और रायबरेली के बीच चौड़ी हो रही सड़क पर आए दिन हादसे हो रहे हैं। सड़क को चौड़ा तो किया जा रहा है लेकिन डिवाइडर नहीं बनाया जा रहा है। इस कारण वाहनों में आमने सामने की भिड़ंत हो रही है।