कुंडा। हादसे का शिकार हुई बरातियों से भरी बोलेरो में जिरगापुर गांव का अभिमन्यु (28) भी सवार था। उसे अगले दिन शुक्रवार की सुबह गुड़गांव जाना था, लेकिन इससे पहले रात में ही उस पर मौत ने झपट्टा मार दिया। वह गुड़गांव में नौकरी करता था। परदेस जाने की तैयारियों के चलते बृहस्पतिवार को वह बरात में नहीं जा रहा था, लेकिन होनी को आखिर कौन टाल सकता है।
तीन साल पहले उसकी शादी सुनीता के साथ हुई थी। दोनों ने साथ मिलकर घर सजाने का सपना बुना था, लेकिन एक ही झटके में नियति ने सुनीता के अरमानों का गला घोंट दिया। दोनों के अभी बच्चे भी नहीं हैं। घर को संवारने के लिए रुपये जुटाने के चक्कर में अभिमन्यु बहुत मेहनत से गुड़गांव में काम कर रहा था। उसकी मौत के बाद पत्नी सुनीता का रो-रो कर बुरा हाल था। उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि अभिमन्यु अब इस दुनिया में नहीं रहा।
अभिमन्यु का एक छोटा भाई अजीत है। दो छोटी बहनों में कल्पना की शादी हो चुकी है, जबकि 19 साल की अल्पना का अभी विवाह होना है। पिता रमेश चंद्र यादव पीआरडी के जवान हैं। बेटे के कमाने से उनकी मुश्किलें धीरे-धीरे कम हो रही थीं। उन्हें यह भरोसा था कि अब घर की परेशानियां दूर होने के साथ ही छोटी बेटी अल्पना का विवाह भी आसानी से हो जाएगा। उन्होंने बेटी के लिए लड़का भी ढूंढना शुरू कर दिया था।
वह अभिमन्यु के नौकरी करने से काफी खुश थे। कच्ची घर-गृहस्थी को संभालने में जुटे अभिमन्यु की मौत के बाद अब फिर से पिता के कंधों पर ही सारी जिम्मेदारी आ गई है। उसके अचानक इस तरह चले जाने से सुनीता की तो दुनिया ही उजड़ गई है। अभी शादी को तीन साल ही हुए थे। बच्चे भी नहीं हैं। आखिर वह किसके भरोसे आगे की जिंदगी बिताएगी।
बेटे की मौत के गम में दरवाजे पर बिलखती रही मां
इस भीषण हादसे ने अभिमन्यु के पड़ोसी दशरथलाल यादव के बेटे दसवीं के छात्र मिथिलेश (16) को भी निगल लिया। शनिवार को पिता दशरथलाल दरवाजे पर गुमसुम बैठे थे। कुछ रिश्तेदार आए थे। उनसे बात करते-करते वह अचानक रोने लगते। मिथिलेश की मां दरवाजे पर बैठकर रो रही थी। भाई-बहन भी गुमसुम पड़े थे। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि यह सब आखिर कैसे हो गया। रोते-रोते सबकी आंखें सूज गई थीं। इसके बाद भी आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।
बहनों की डोली उठने से पहले दुनिया से विदा हो गया बबलू
जिरगापुर गांव निवासी बबलू (22) भी काल के इस क्रूर मजाक का शिकार बना। तीन भाइयों में दूसरे नंबर के बबलू की अभी शादी नहीं हुई थी। वह घर पर रहकर ही खेतीबाड़ी करता था। बड़े भाई विनोद की शादी हो चुकी है, जबकि छोटा अर्जुन अभी 15 साल का है। बबलू की दो बहनों की शादी होनी है। बहनों की शादी के चक्कर में ही वह अपना विवाह करने के लिए तैयार नहीं था। उसने धूमधाम से दोनों बहनों की डोली घर से उठाने का सपना संजोया था, लेकिन शायद विधाता को यह मंजूर नहीं था। उनकी डोली उठाने से पहले वह खुद ही दुनिया से उठ गया। उसकी मौत के बाद से ही परिवार के लोग बदहवाश हैं।