दीवानी अदालतें मुकदमों के बोझ से दबी हैं। अधिकतर मामले वर्षों चल रहे हैं। इन मामलों का निस्तारण भले न हो पा रहा हो, लेकिन नए केसों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। प्रतापगढ़ दीवानी न्यायालय में एक लाख से भी अधिक मुकदमे लंबित हैं। इसके पीछे जजों की कमी भी बहुत बड़ा कारण है। मुकदमों के हिसाब से जजों की संख्या बेहद कम है। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो जिले में 1,14,116 मुकदमे विचाराधीन हैं। इसके बाद भी सेशन और लोअर कोर्ट की 11 अदालतें वर्षों से खाली पड़ी हैं।
जिले के कुंडा, लालगंज और मुख्यालय के लोअर कोर्ट सहित सेशन कोर्ट में 1,14,116 मुकदमों का ट्रायल चल रहा है। इसमें परिवार न्यायालय के 5116 मामले शामिल हैं। दीवानी न्यायालय में विचाराधीन मामलों में सिविल वादों की संख्या सबसे अधिक है। इसके बाद फौजदारी के मुकदमे हैं। लालगंज दीवानी न्यायालय में सबसे कम और मुख्यालय स्थित लोअर कोर्ट में सबसे अधिक केस चल रहे हैं। जिले में सत्र न्यायालयों की संख्या आठ है, जिनमें से सात न्यायालयों में लगातार मामलों की सुनवाई हो रही है। सीनियर डिवीजन की पांच अदालतें तो कार्य कर रही हैं, मगर लोअर कोर्ट में चार ही जज हैं। मुख्यालय में लोअर कोर्ट की 14 अदालतें हैं। एक सेशन कोर्ट और दस लोअर कोर्ट लंबे समय से खाली चल रही हैं। इन अदालतों में लंबे समय से जजों की तैनाती नहीं हो सकी है। लोअर कोर्ट में मामलों का निपटारा नहीं होने से पीड़ित अपीलीय कोर्ट नहीं पहुंच पा रहे हैं। जो अदालतें चल रही हैं, उनमें जजों पर काम का दबाव बहुत अधिक है। उन्हें हर दिन पचास से भी अधिक फाइलें निपटानी पड़ रही हैं।