परियांवा। जज्बा हो तो दुनिया का कोई भी काम असंभव नहीं है। इसी कहावत को चरितार्थ करते हुए नौ साल की श्रद्धा शुक्ला कालाकांकर घाट पर पहुंची। कानपुर की यह बच्ची गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने के लिए गंगा की लहरों को चीरते हुए संगम घाट जा रही है।
कानपुर के सर्किट हाउस कैंट निवासी ललित शुक्ला की नौ वर्षीय पुत्री श्रद्धा कक्षा चार की छात्रा है। उसे तैराकी का शौक है। वह तैराकी में कई अवार्ड भी जीत चुकी है। अब वह कानपुर से गंगा की लहरों को चीरते हुए संगम तक की यात्रा कर रही है। 25 मार्च को वह कानपुर से निकली और 27 को कालाकांकर घाट पहुंची। इस दौरान उसे देखने के लिए भारी भीड़ जुट गई। ब्लाक प्रमुख बीएन सिंह भी उससे मिलने कालाकांकर घाट पहुंचे। उसके पिता ने बताया कि श्रद्धा के शौक को देखते हुए काम को छोड़कर उसके साथ जाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि उसके तैरने के दौरान पीछे दो नावें चलती हैं। इसमें खाने-पीने के सामान के साथ ट्रेंड तैराक भी मौजूद हैं जिससे किसी का प्रकार का खतरा होने पर उसे बचाया जा सके। श्रद्धा ने बताया कि उसका उद्देश्य गिनीज बुक में नाम दर्ज कराना है। उसने मौके पर जुटे लोगों से कहा कि वे अपने बच्चों के किसी भी शौक को पूरा करने में सहयोग करें। बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि वह अपने मां-बाप का नाम रोशन करें। उसने लोगों को मतदान के बारे में भी जागरूक करते हुए कहा कि वे मतदान अवश्य करें।