पट्टी। आसपुर देवसरा इलाके में चक्रवाती तूफान ने भारी तबाही मचाई। दर्जन भर गांवों में सैकड़ों पेड़ और बिजली के पोल धराशाई हो गए। छप्पर पर पेड़ गिरने से एक अधेड़ की मौत हो गई। दस मिनट में भीषण तबाही का मंजर देख लोग कांप उठे। काफी देर के लिए लखनऊ-वाराणसी राजमार्ग पर आवागमन बाधित रहा।
आसपुर देवसरा इलाके में बुधवार की दोपहर दस मिनट के लिए आए चक्रवाती तूफान ग्रामीणों पर कहर बनकर टूटा। तूफान से बचने के लिए लोग घरों में दुबके लेकिन कई लोगों को भय के कारण अपना मकान छोड़ना पड़ा। तूफान से देवरखा, नीमा, गोपालपुर, बोझीपट्टी, सोनपुरा, विनैका व मुनीपुर सहित ढखवा बाजार का अधिकांश हिस्सा प्रभावित हुआ। चक्रवाती तूफान से इन गांवों के सैकड़ों पेड़ व बिजली के पोल पल भर में धराशाई हो गए। लोगों के छप्पर और टिनशेड हवा में उड़ गए। इस बीच देवरखा गांव निवासी कंतलाल यादव (55) अपने छप्पर के नीचे लेटा हुआ था। अचानक तूफान के चलते उसके छप्पर पर नीम का पेड़ आ गिरा। जब तक उसे बाहर निकाला जाता मौत हो चुकी थी। दस मिनट के भीतर ही प्रभावित गांवों का नजारा बदल गया। तूफान शांत होने के बाद दहशतजदा ग्रामीण सहज हो सके। गांव के पंकज सिंह, वीरेन्द्र, श्रीराम पाल आदि का कहना है कि उन्होंने कभी ऐसा तूफान नहीं देखा था। इन गांवों में तबाही का मंजर देख लोग कांप उठे। ग्रामीणों के कच्चे मकान से छप्पर गायब हैं। बिजली सप्लाई के पोल टूटे पड़े हैं। ढखवा बाजार का आंशिक हिस्सा प्रभावित होने से वाराणसी-लखनऊ राजमार्ग पर वृक्ष गिर गए। इससे हाईवे पर जाम लग गया। बाद में ग्रामीणों ने वृक्षों को काट कर रास्ता बनाया तब यातायात बहाल हो सका। भाजपा के पूर्व विधायक राजेन्द्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह ने मृतक कंत लाल यादव की मौत पर संवेदना जाहिर करते हुए उसके परिवार को सहायता दिए जाने की मांग की है। चक्रवाती तूफान ने भले ही दर्जन भर गांवों को प्रभावित किया हो लेकिन उसके कहर से बीस गांवों में अंधेरा रहेगा। तमाम कोशिशों के बाद भी करीब एक सप्ताह बाद ही बिजली के पोल खड़े हो सकेंगे। प्रभावित गांवों से ही दूसरे गांवों की बिजली आपूर्ति होती है। इस आपदा से निपटने के लिए बिजली विभाग ने क्षति का जायजा लिया।
इलाके में बुधवार की दोपहर डेढ़ घंटे की झमाझम बारिश ने खेतों को पानी से भर दिया। धान की फसल की सिंचाई करने की सोच रहे किसानों ने बरसात होने से राहत की सांस ली।