प्रतापगढ़। नवजातों की सुरक्षा जिला महिला अस्पताल में दांव पर है। बुधवार सुबह एक नवजात उठाकर महिला भाग निकली। इमरजेंसी में मौजूद नर्सों की उस पर निगाह पड़ गई। नर्सों ने शोर मचाते हुए महिला को दौड़ा लिया। खुद को फंसते देख महिला बच्चे को छोड़ पीछे की गली से जिला अस्पताल की तरफ भाग गई।
सुल्तानपुर के कोइरीपुर लम्हुआ निवासी शमीम ने सुबह करीब 8.30 पत्नी तरन्नुम को प्रसव के लिए भर्ती कराया। करीब दस मिनट बाद तरन्नुम ने बच्ची को जन्म दिया। नर्सों के मुताबिक बच्ची काफी कमजोर थी। इसलिए बच्ची को एसएनसीयू में भर्ती करने के लिए भेज दिया। शमीम नर्सों के पास कागजात दुरुस्त करा रहा था। जबकि पत्नी जनरल वार्ड में बच्ची संग बेड पर लेटी थी। इसी बीच एक महिला प्रसूता के पास पहुंची और बच्ची को एसएनसीयू में ले जाने की बात कही। महिला को अस्पताल कर्मी समझ तरन्नुम ने बच्ची उसे दे दी। महिला नवजात को लेकर जैसे ही गेट पर पहुंची तभी शमीम आ गया। बच्ची गायब देख वह उस महिला को पकड़ने के लिए इमरजेंसी गेट के पास पहुंचा। इसी दौरान शोरगुल होने से नर्सों को भी बच्ची चोरी होने की जानकारी हो गई। ड्यूटी पर मौजूद नर्सों ने बिना देर किए बच्चा चोर महिला को दौड़ा लिया। खुद को फंसते देख महिला नवजात को जमीन पर छोड़ पीछे की गली से जिला अस्पताल की ओर भाग निकली।
नगर कोतवाली के छैवा गांव निवासी मो. सिद्दीक के पुत्र जीशान (8) को एक युवक ने अगवा कर लिया। तलाश में जुटे ग्रामीणों ने कुछ देर में युवक को दबोच लिया और बालक को मुक्त कराने के बाद उसकी जमकर धुनाई कर दी। सूचना पर पहुंची चौकी पुलिस उसे कोतवाली ले गई, जहां से युवक को मनोरोगी करार देते हुए छोड़ दिया गया। वहीं गांव में अनहोनी की आशंका से भयभीत लोगों ने अपने बच्चों को घरों में कैद कर दिया है।
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