प्रतापगढ़। हर माह लुटती महिलाआें की अस्मत बचा पाने में सरकार के नुमाइंदे (अफसर) विफल हैं। हद यह है कि घटनाओं की कालिख को वे जुबानी पानी से धुलने का प्रयास कर रहे हैं। अपनों की नाकामी पर पर्दा डालने में जुटे अफसरों की करतूत दरिंदों की ताकत बढ़ रही है। शायद यही वजह रही कि रेप की शिकार युवती की दरिंदों ने कोर्ट में बयान पूर्व जीभ काट दी।
गांव से लेकर शहर तक युवतियों और महिलाओं की अस्मत के लुटेरे प्रशासन को बार-बार चुनौती दे रहे हैं। हर माह कहीं न कहीं हवस के भूखे भेड़ियों ने महिलाओं के दामन को नोंचने का काम किया। बेहद शर्म की बात यह है कि थाने के भीतर भी महिलाओं की आबरू सुरक्षित नहीं बची। खाकी में छिपी राक्षसी आत्माओं ने भी महिलाओं की पाक आबरू को कलंकित किया। इस बीच गे-सेक्स (अप्राकृतिक दुराचार) की घटनाएं भी सामने आईं। अप्रैल माह में 2 तारीख को अंतू के उपाध्यायपुर की युवती से थाने में चौकीदार ने दुराचार किया। 7 अप्रैल को पुलिस लाइन में शिकायत करने आई रानीगंज की युवती को सिपाही ने कमरा बंदकर हवस का शिकार बनाया। इसी दिन दरिंदों ने जेठवारा के श्रीपुर गांव की तीन वर्षीय बच्ची को चाकलेट में नशीली दवा खिलाकर दुराचार किया। 18 अप्रैल को मानिकपुर के बनकटिया गांव की किशोरी को पड़ोसी ने हरिद्वार ले जाकर दुराचार किया। तारीख के साथ दुाराचार की घटनाएं भी बढ़ती गईं। 23 अप्रैल को कोहड़ौर की किशोरी से मदरसा शिक्षक और उसके साथी ने मुंह काला किया। इसी दिन नगर कोतवाली के अचलपुर की किशोरी की इज्जत होटल में रिश्तेदारों ने ही लूट ली। 1 मई को आसपुर देवसरा के रानीगंज गांव में शौच को गई किशोरी से गैंगरेप हुआ। 7 मई को नगर कोतवाली के सदर बाजार की महिला से चाकू के बल पर दुराचार किया गया। 8 मई को अंतू के भवानीपुर की किशोरी को अगवा कर रेप हुआ। इसी दिन जेठवारा के सरायनाहर गांव की महिला से नाले में रेप किया गया। 11 मई को नवाबगंज के वाजिदपुर में महिला को बंधक बना कर बलात्कार हुआ। इसी तरह 20 मई को महेशगंज के निष्ठा गांव की 7 वर्षीय बालिका से पड़ोसी ने हवस की भूख मिटाई। 1 जून को उदयपुर के देवरी बदलापुर गांव में घर में घुसकर दुराचार, 14 जून को कोहंडौर के भौसिया गांव की किशोरी की बराछा जंगल में प्रेमी ने साथियों संग आबरू लूटी, 21 जून को अंतू के लोनियामऊ में युवक ने अर्धविक्षिप्त युवक से अप्राकृतिक दुराचार किया। जुलाई माह में हवसियों ने जेठवारा क्षेत्र की एक युवती की जीभ इसलिए काट दी ताकि वह कोर्ट के समक्ष बयान न दे सके। औरंगाबाद में दस दिन पूर्व हुए रेप के आरोपी की गिरफ्तारी न होने से सिपाही पिट गया। इतनी घटनाओं के बाद भी खामोश प्रशासनिक अफसर नाकामी का दाग जुबानी धुलने का प्रयास कर रहे हैं। गुरुवार की देर रात एसपी की बुलाई गई प्रेस कांफ्रेंस को इसी सोच का परिणाम माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष जरीना उस्मानी भी यह मानती हैं कि रेप पीड़ित महिलाओं की सुरक्षा में कोताही हो रही है। शुक्रवार को जिला अस्पताल पहुंचीं अध्यक्ष ने भी पुलिस की कार्यदशा पर अंगुली उठाईं। कहा कि जब पुलिस जानती थी कि मामला गंभीर है और युवती को कोर्ट में बयान देना है तो उसकी सुरक्षा बढ़ानी चाहिए थी।