प्रतापगढ़। बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर नौकरी हथियाने वाले आठ शिक्षकों पर विभाग की गाज गिरी है। इन शिक्षकों के प्रमाणपत्र सत्यापन में फ र्जी पाए गए थे। वर्ष 2005 में इस बात का खुलासा होने के बाद भी अधिकारी चुप्पी साधे थे। शीर्ष अधिकारियों की फटकार के बाद अधिकारियों ने प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए बीईओ को जिम्मेदारी सौंपी है।
वर्ष 2004 में विशिष्ट बीटीसी शिक्षक चयन के तहत जिले में लगभग चार सौ से अधिक शिक्षकों का चयन किया गया। डायट में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे शिक्षकों के अंकपत्रों और प्रमाणपत्रों के सत्यापन का अभियान विभाग ने चलाया। वर्ष 2005 में यूपी बोर्ड और विश्वविद्यालय से हुए सत्यापन में चौदह शिक्षकों के अभिलेख फर्जी मिले। इनमें से पांच शिक्षकों के पुन: सत्यापन कराने के अनुरोध पर उनके अभिलेख दुरुस्त निकल गए। मगर आठ शिक्षक फर्जी दस्तावेज नहीं छिपा सके। तत्कालीन बीएसए बृजेश मिश्र ने इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी। शिक्षा निदेशक ने 30 मार्च को पत्र जारी कर अंतू के बरकंदापुर निवासी लल्लूराम, सांगीपुर के पूरे गोसाई खजुरी निवासी बसंत मोहन मिश्र, मानधाता के पूरेसुखदेव निवासी सजनलाल गौड़, सांगीपुर स्थित पूरे गोसाई के माधुरी देवी, कंधई के मदुरारानीगंज निवासी शिवनारायण मिश्र, उडै़याडीहपट्टी के पूरे निहाली की सरिता वर्मा, कालाकांकर स्थित परसई पाइकगंज के रामकृष्ण और कंधई के साल्हीपुर निवासी त्रिलोचन कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश दिया है। इनमें से लल्लूराम रामपुरसंग्रामगढ़ के प्राथमिक विद्यालय धनाटिकरिया, माधुरी देवी मानधाता के प्राथमिक विद्यालय धरमपुर, सरिता वर्मा मंगरौरा के प्राथमिक विद्यालय डोमनपुर, रामकृष्ण प्राथमिक विद्यालय सिंधौर में तैनात थे जबकि अन्य प्रशिक्षण प्राप्त कर तैनाती की प्रतीक्षा कर रहे थे। नियुक्ति पाने वाले चारों शिक्षकों को विभाग ने पहले ही बाहर कर दिया है। मगर शासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्राथमिकी दर्ज कराने का फैसला किया है। बीएसए एसटी हुसैन ने बताया कि सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारियों के आदेश की प्रति उन्हें दे दी गई है।