प्रतापगढ़। जिले में महिलाओं की आबरू पर आए दिन हमला हो रहा है। दिल्ली की घटना के बाद आला अफसरों ने इस दिशा में कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया लेकिन पुलिस पुरानी चाल से चल रही है। तीन माह के भीतर महिला अपहरण की घटनाओं में जहां बेतहाशा वृद्धि हुई है वहीं तमाम मामलों को दर्ज करने के बजाय पुलिस झूठा करार देकर टरका देती है।
दिल्ली में छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद कड़ी सजा के लिए लोकसभा में इसी सप्ताह विधेयक पेश किया गया था। आला अधिकारी भी इस मामले में खासी संवेदनशीलता दिखा रहे हैं लेकिन जिले के थानेदार इसके प्रति गंभीर नहीं हैं। लड़की को घूरना, छेड़ना गुनाह है लेकिन यहां तो दुष्कर्म की घटनाओं को भी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। दो दिन पहले अंतू थाना क्षेत्र में एक महिला को बंधक बनाकर दुष्कर्म का मामला सामने आया था। लोगों के भारी दबाव पर पुलिस ने आरोपी को हिरासत में तो लिया लेकिन बाद में छोड़ दिया। घटना मीडिया की सुर्खियां बनी लेकिन पुलिस ने उसे दबा दिया। रानीगंज थाना क्षेत्र में 16 मार्च को कुछ लोगाें ने बहला फुसलाकर एक किशोरी को अगवा कर लिया। चार लोगों के खिलाफ बलात्कार के इरादे से अपहरण की रिपोर्ट दर्ज की गई लेकिन न तो आरोपी पकड़े गए और न ही किशोरी का कोई पता चला। कंधई के दीवानगंज इलाके के एक गांव की किशोरी शुक्रवार को संदिग्ध हालत में गायब हो गई। उसके दादा ने थाने में रिपोर्ट लिखाई लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसी सप्ताह लालगंज में छह साल की बालिका के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया गया। अनदेखी कर रही पुलिस ग्रामीणों के आक्रोश पर आरोपी को गिरफ्तार किया। पुलिस ढिलाई के चलते बीते ढाई माह में बलात्कार के इरादे से अपहरण की 22 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इस बाबत एएसपी आशाराम यादव का कहना है कि सभी थानेदारों को छेड़खानी, दुष्कर्म के मामलाें में त्वरित कार्रवाई के लिए कहा गया है। जिन लोगाें ने इसमें ढिलाई की है, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।