फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गुलसुपाड़ी, गेंदा के फूलों से सजा गणेश-लक्ष्मी का दरबार

विज्ञापन
विज्ञापन
प्रतापगढ़। माता लक्ष्मी और भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए इस वर्ष भोले की नगरी काशी से फूल मंगाए गए। जिले में फूलों की पैदावार कम होने और दिवाली पर मांग अधिक होने के कारण दुकानदारों ने वाराणसी से फूल मंगाया है। वाराणसी से आई विशेष गुलसुपाड़ी फूलों की माला से पूजन कर लक्ष्मी को प्रसन्न किया गया। मान्यता है कि दिवाली के बाद भी न सूखने वाला यह फूल सालभर सुख और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। दिवाली पर श्रद्धालुओं ने गणेश-लक्ष्मी के दरबार को गेंदा और मोर पंख से सजाकर विधिवत पूजा-अर्चना की।
विज्ञापन


दिवाली के दिन घर-घर होने वाली लक्ष्मी-गणेश की पूजा में फूल आवश्यक होता है। गेंदे के फूल से पूजा करने के साथ-साथ सजाने के भी काम आता है। ये ऐसा पुष्प होता है, जो हर शुभ कार्य में प्रयोग होता है। अगर दिवाली की बात की जाए तो इस मौके पर कमल, गुलसुपाड़ी और मोरपंखी का पूजन में विशेष महत्व होता है। दिवाली पर अंबेडकर चौराहे पर दो दिन से पुष्पों की दुकान लगाने वाले शिवकुमार बताते हैं कि गुल सुपाड़ी का पुष्प सुपाड़ी के आकार का बैगनी रंग का होता है। किनारे-किनारे की पत्तियां हरी होती है। कहा जाता है कि इस पुष्प की विशेष माला के चढ़ाने से लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं। इसकी विशेषता है कि यह जल्दी सूखता नहीं हैं। पानी में एक बार भिगो देने से ये पहले जैसे हरा-भरा हो जाता है। मान्यता है कि पुष्प की इस विशेषता को धार्मिक मान्यताओं से जोड़ दिया गाय है। जिस तरह से गुल सुपाड़ी का फूल हरा-भरा रहता है उसी तरह से मनुष्य के जीवन में भी लक्ष्मी की कृपा बनी रहे। उनके जीवन में हरा-भरा रहे। कमल का अपना ही महत्व है। वैसे तो यह ज्ञान की देवी सरस्वती और ब्रहृमजी को बहुत प्रिय है, मगर दिवाली पर इससे पूजन का विशेष महत्व है। मोरपंखी को भी विद्या यानी सरस्वती देवी का प्रतीक माना जाता है। लक्ष्मी और सरस्वती का एक ही रूप है। दिवाली पर मोरपंखी, कमल पुष्प और गेंदे से सजे गुलदस्ते से पूजा कर धन के साथ ज्ञान की वृद्धि भी कामना की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें