प्रतापगढ़। आज यानी मंगलवार से जिले में बिना जिला प्रशासन की अनुमति के लाउडस्पीकर का प्रयोग नहीं किया जा सकेगा। धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर बजाने के लिए 1499 लोगों ने जिला प्रशासन से अनुमति मांगी है। हाईकोर्ट के आदेश का पालन कराने के लिए अफसरों ने कमर कस ली है। अनुमति लेने के लिए आखिरी दिन बड़ी संख्या में एसडीएम कार्यालय में आवेदन करने वाले पहुंचे। यदि किसी धार्मिक स्थल पर बिना अनुमति के लाउडस्पीकर बजता मिला तो कार्रवाई होगी।
न्यायालय की बंदिश के बाद धार्मिक स्थलों पर नियमित बजने वाले लाउडस्पीकरों को लेकर प्रशासन गंभीर हो गया है। ऐसे धर्मस्थलों को चिह्नित करने का काम शुरू किया गया है, जहां बिना अनुमति के लाउडस्पीकर बज रहे हैं। सभी थाना प्रभारियों को रिपोर्ट तैयार करने के लिए निर्देशित किया जा चुका है। सभी थानाध्यक्षों ने सिपाहियों को ऐसे स्थलों को चिह्नित करने के लिए लगाया है। रात दस बजे से सुबह छह बजे तक लाउडस्पीकर पर बैन लगाया गया है। सोमवार को आखिरी दिन एसडीएम कार्यालयों में अनुमति लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। जिले की सभी तहसीलों में कुल 1499 आवेदन पत्र अनुमति के लिए पहुंचे। सभी आवेदनपत्रों की जांच के लिए पुलिसकर्मी संग राजस्व विभाग की टीम को लगाया गया है। 16 जनवरी से कोई भी ध्वनि विस्तारक यंत्र बिना अनुमति के बजता मिला तो प्रशासनिक अमला कार्रवाई करेगा।
शासन के निर्देश में साफ कहा गया है कि जिन्हें लाउडस्पीकर या आवाज वाले अन्य यंत्र लगाने की अनुमति दी जाए, वहां भी ध्वनि प्रदूषण नियम 2000 के अंतर्गत क्षेत्र और समय के मुताबिक निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन कराया जाए। नियम न मानने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। शादी समारोहों, जुलूस और जलसों के दौरान भी इनका पालन कराया जाए। बिना अनुमति लाउडस्पीकर बजाने पर कड़ी सजा का प्रावधान है। पर्यावरण संरक्षण 1986 अधिनियम की धारा 15 के तहत यह दंडनीय अपराध है। इसका उल्लंघन करने पर पांच साल का कारावास या एक लाख का जुर्माना या दोनों सजा एक साथ हो सकती है। इसके तहत हर दिन के उल्लंघन की पांच हजार रुपये प्रतिदिन की सजा अलग से है।
ध्वनि प्रदूषण नियमन एवं नियंत्रण नियम 2000 में यह प्रावधान है कि आडिटोरियम, कॉन्फ्रेंस रूम, कम्युनिटी हाल जैसे बंद स्थानों को छोड़कर रात दस बजे से प्रात: 6 बजे तक लाउडस्पीकरों का प्रयोग नहीं किया जाएगा। हालांकि राज्य सरकार को यह छूट है कि वह एक वर्ष में अधिकतम 15 दिनों के लिए सांस्कृतिक या धार्मिक अवसरों पर रात 10 बजे से रात 12 बजे के बीच शर्तों के साथ लाउडस्पीकर बजाने की छूट दे सकती है। सार्वजनिक और निजी स्थानों पर लाउडस्पीकर की ध्वनि सीमा क्रमश: 10 डेसिबल और पांच डेसिबिल से अधिक नहीं होगी। शादी समारोहों में तेज आवाज में डीजे और लाउडस्पीकर बजने से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को रोकने पर भी अधिकारियों ने काम शुरू कर दिया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब इसके लिए भी अनुमति लेनी होगी। सदर एसडीएम पंकज वर्मा ने बताया कि बैंड-डीजे पार्टी संचालकों के साथ बैठक की जाएगी। उन्हें बताया जाएगा कि बुकिंग के समय वह इस बात को संबंधित पक्ष के समक्ष रख दें कि बारात में लाउडस्पीकर और तेज ध्वनि के यंत्रों का प्रयोग हुआ तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। ऐसे में वे लोग भी पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए ध्वनि प्रदूषण पर लगी रोक का पालन करेंगे।
वहीं इमाम, गुलशने मदीना मसजिद, पल्टन बाजार मौलाना समीउल्ला का कहना है कि ध्वनि प्रदूषण रोकने का आदेश सभी के लिए समान रूप से लागू किया जा रहा है। इसका पालन होना चाहिए। नियम सब के लिए बराबर हैं। नमाज पढने वाले खुद समय के पाबंद रहते हैं। उन लोगों को मालूम रहता है कि नमाज किस वक्त पर होती है। मौलाना अब्दुल्लाह, जनरल सेक्रेटरी, जमीयत उलमाए हिन्द का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश का एहतराम करें, मुसलमानों को मसजिदों में अजान के लिए परमिशन लेनी चाहिए। मदरसों में होने वाले जलसों के लिए भी अपनी तहसील में दरख्वास्त देकर इजाजत लें। ताकि किसी को एतराज करने का मौका न मिल सके। जब लाउडस्पीकर नहीं था, तब भी लोग मसजिदों में समय पर पहुंचकर नमाज पढ़ते थे। जमीयत उलमाए हिन्द लोगों से अपील करती है कि मसजिदों में अजान के लिए परमिशन लें। यदि कोई दिक्कत आती है तो जमीयत के पदाधिकारियों से राफ्ता कायम करें। मयंक भाल गिरि, महंत, घुइसरनाथधाम का कहना है कि ध्वनि प्रदूषण से तो लोगों को समस्या होती है। फिर भी मंदिर और मसजिद समेत दूसरे धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाना अच्छा नहीं लग रहा है। इसी माध्यम से भक्तों के कान में धर्म के दो शब्द पहुंच जाते थे। विशेष धामक पर्व पर इसकी अनुमति मिलनी चाहिए। जिलाधिकारी शंभु कुमार का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में शासन द्वारा जारी निदेर्शों के मुताबिक बिना अनुमति के लाउडस्पीकर नहीं बजाने दिए जाएंगे। इसके लिए सभी को जानकारी दे दी गई है।