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न बैनर दिखा न होर्डिंग्स, ओडीएफ के प्रचार में फूंक दिए 13 करोड़

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न बैनर दिखा न होर्डिंग्स, ओडीएफ के प्रचार में फूंक दिए 13 करोड़
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कागज पर ही अधिकारियों ने दिया प्रशिक्षण, नहीं तैयार किया खर्च कोई ब्यौरा, अधिकारियों ने साधी चुप्पी
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। जिले में ओडीएफ के प्रचार-प्रसार के नाम पर करोड़ों खेल हुआ है। होर्डिंग्स, बैनर, प्रशिक्षण सहित प्रचार सामग्रियों के नाम पर अधिकारियों द्वारा महज खानापूर्ति की गई है। शहर से लेकर गांव तक न तो बैनर दिखाई दिए और न ही होर्डिंग्स। जबकि इसके नाम पर 13 करोड़ से अधिक की रकम खर्च कर दी गई है। मजे की बात यह है कि प्रचार-प्रसार के लिए खर्च की गई इतनी बड़ी रकम का विभागीय अधिकारियों के पास ब्यौरा तक नहीं है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्तूबर 2014 में ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) अभियान की शुरुआत की थी। जिले में इस अभियान की शुरुआत 2017 में हुई। ब्लाक स्तरीय अधिकारियों ने ग्राम प्रधान के साथ गांवों का भ्रमण कर शौचालय विहीन घरों को चिह्नित किया। जिले की 1255 ग्राम पंचायतों में कुल 3 लाख 74 हजार 311 शौचालयों के निर्माण की सूची तैयार की गई। जिला पंचायती राज अधिकारी द्वारा शौचालयों के निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया। 374311 शौचालयों के सापेक्ष कुल 521.34 करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ। वहीं अभियान के तहत गांवों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता के लिए 9 करोड़ 45 लाख रुपये भी विभाग को मिले। उद्देश्य था कि ग्रामीणों को स्वच्छता के प्रति प्रेरित किया जाए। वह शौचालय की उपयोगिता समझें और इसका प्रयोग करें। ताकि मिशन को सार्थकता मिल सके। इसका व्यापक प्रचार प्रसार किया जाना था। शहर से गांव तक बैनर, होर्डिंग्स लगाए जाने थे। इसके अलावा गांवों में ग्रामीणों को स्वच्छता के प्रति प्रशिक्षण भी दिया जाना था। मगर ऐसा हुआ नहीं। सच तो यह है कि ओडीएफ के प्रचार-प्रसार के नाम पर जिले के रानीगंज, पट्टी, कुंडा, लालगंज व सदर सहित पांचों तहसीलों में महज खानापूर्ति की गई। बैनर व होर्डिंग्स लगाने के नाम पर महज रुपये उड़ाए गए। शहर से लेकर गांव तक न तो बैनर दिख रहे हैं और न ही होर्डिंग्स। इतना ही कागज पर ही प्रशिक्षण कार्यक्रम भी पूरा कर लिया। जबकि जिला पंचायत राज अधिकारी का दावा है कि ओडीएफ के प्रचार- प्रसार के लिए आए बजट की अब फूटी कौड़ी भी नहीं बची है। पूरा बजट प्रचार-प्रसार में खपा दिया गया। डीपीआरओ उमाकांत पांडेय ने बताया कि प्रचार-प्रसार के लिए समुचित समाग्री का इस्तेमाल किया गया है। इसका ब्यौरा तैयार है। मांग की जाएगी तो प्रस्तुत किया जाएगा।
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डीपीआरओ के पास नहीं है बजट का ब्यौरा
ओडीएफ जैसे सरकार के महात्वाकांक्षी मिशन के प्रचार-प्रसार को स्वीकृत 9.45 करोड़ के बजट का ब्यौरा विभाग के पास नहीं है। कितनी धनराशि होर्डिंग्स में लगी, कितना बैनर में खर्च किया गया। कहां- कहां जागरूकता संबंधी प्रशिक्षण हुए। इसका विभाग के पास कोई रिकार्ड नहीं है। डीएम की समीक्षा बैठक में हुए सवाल पर डीपीआरओ इसका जवाब नहीं दे सके।
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शौचालय निर्माण में भी कई ब्लाकों में हुई है घपलेबाजी, हो चुकी है कार्रवाई
ओडीएफ के तहत जिले में शौचालय निर्माण में कई ब्लाकों में घपलेबाजी हुई है। बगैर शौचालय बने ही भुगतान हो चुका है। जांच में पोल खुलने पर ब्लाक के अधिकारियों व ग्राम प्रधान तक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जा चुकी है। जिले के शिवगढ़, बाबागंज, आसपुर देवसरा, संडवाचंद्रिका सहित आधा दर्जन ब्लाकों में घपलेबाजी मिली है।
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ओडीएफ घोषित 718 गांवों में अधूरे पड़े हैं शौचालय
जिले को ओडीएफ घोषित कर विभागीय अधिकारी भले ही अपनी पीठ थपथपा रहे हों, मगर यह दावे महज कागजी हैं। जांच में 718 गांव ऐसे हैं, जहां अभी भी निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। इतना ही नहीं कई घर ऐसे भी मिले हैं, जहां शौचालय तक नहीं हैं। जांच में पोल खुलने पर विभागीय अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं।
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