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खजाना खाली, थम गया सीवर लाइन का काम

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जलनिगम का खजाना खाली, थम गया सीवर लाइन का काम
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पहले राउंड का काम भी नहीं हो सका पूरा, शहर में दो स्थानों पर बिछनी है पाइप लाइन
आईपीएस पंप बनाने का विभाग के पास नहीं है बजट
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। जल निगम का खजाना खाली होने के कारण सीवर लाइन का काम पूरा नहीं हो सका। कई वर्षों से बनकर तैयार सीवर ट्रीटमेंट प्लांट भी खराब हो गया है। अभी दो स्थानों पर पाइप लाइन बिछाने का काम बाकी है और आईपीएस पंप बनाना अधर में है। जिससे लगता है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी शहर की गंदगी से नदी व नाले प्रदूषित होंगे रहेंगे।
शहर में अर्से से सीवर लाइन की मांग हो रही थी। जिसे पूर्व सपा सांसद अक्षय प्रताप सिंह गोपालजी के प्रयास से तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने वर्ष 2005-06 में शहरियों को सौगात दी। सीवर लाइन के टेंडर के बाद कार्यदायी संस्था को लेकर व्यवधान रहा। बाद में बसपा सरकार में रेट फिर रिवाइज हुआ। जिसके बाद वर्ष 2008-09 में 18 करोड़ 20 लाख रुपये की लागत से शहर में पाइप लाइन बिछाने और सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण के लिए बजट जारी हुआ। शहर में निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ लेकिन दस साल बाद भी सीवर लाइन अधर में लटका रहा। पाइप लाइन ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ जरूर दिया गया लेकिन अभी भी पहले राउंड का काम बाकी है। शहर में करीब 12 किमी पाइप लाइन बिछाई जानी थी लेकिन अभी भी निर्मल तिराहे से लेकर चौक घंटाघर और सदर बाजार चौराहे से लेकर कांशीराम कालोनी जीआईसी तक पाइप लाइन बिछाने का काम बाकी है। रामलीला मैदान के पास ही इंटरमीडिएट पंपिगप्रोसेसिंग सप्लाई पंप बनना था। उसका काम भी अधर में लटका हुआ है। सूत्रों की मानें तो पहले राउंड का काम पूरा कराने के लिए विभाग के पास बजट ही नही है। शासन से जारी बजट खर्च हो चुका है। जबकि अभी काफी काम अवशेष है। प्रभारी एक्सईएन आरएस वर्मा ने बताया कि शासन को पत्र भेजा गया है। बजट मिलने के बाद ही आगे काम प्रारंभ होगा।
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पहला राउंड पूरा नहीं तो दूसरे का कैसे प्रारंभ हो काम
अभी सीवर लाइन बिछाने व आईपीएस पंप बनाने का काम अधर में लटका हुआ है। जब पहले राउंड का काम पूरा नहीं हो सका तो दूसरे राउंड का काम कैसे प्रारंभ होगा। दूसरे राउंड का काम प्रारंभ होने के बाद ही विभाग को शासन की ओर से धनराशि आवंटित होगी। दूसरे राउंड में जल निगम द्वारा मोहल्ले की गलियों में पाइप लाइन बिछा कर मकानों में कनेक्शन का काम होना था। जिसे पूरा होने के आसार नहीं दिख रहे हैं। जब मेन लाइन ही नहीं बिछ सकी तो मोहल्ले की गलियों में कहां से पाइप लाइन बिछेगी।

चिलबिला-महुली रह गए अछूते
नगर पालिका में 25 वार्ड हैं। शहर के उत्तरी दिशा में चिलबिला पूर्वी व पश्चिमी वार्ड के साथ ही महुली पड़ता है। इस ओर सीवर लाइन नहीं बिछाई गई। जिससे इन इलाके के लोगों को अभी कुछ दिनों तक समस्या झेलनी पड़ेगी। चूंकि बीच में सई नदी भी अवरोध पैदा करती है।
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सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की मरम्मत के लिए भी नहीं मिला बजट
जलनिगम द्वारा पिछले साल दावा किया जाता रहा कि सीवर लाइन को सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़ दिया गया है। जल्द ही सीवर लाइन काम करने लगेगा। शहर के शौचालयों का गंदा पानी नालों व नदियों में नहीं गिरेगा लेकिन ऐसा नहीं हो सका। कई सालों से बनकर तैयार सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के उपकरण में जंग लग गए। जिसे बदलने के लिए पूना की कंपनी के इंजीनियरों की टीम आ चुकी है। उसने उपकरणों की मरम्मत पर 40 से 50 लाख रुपये खर्च होने स्टीमेट बनाकर विभाग को दिया है। जलनिगम ने उपकरणों की मरम्मत के लिए धनराशि की डिमांड शासन व निदेशालय भेज दी लेकिन अभी तक एक रुपया भी नहीं मिल सका। जिसके कारण सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की मरम्मत नहीं हो पा रही है।
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