स्वच्छ भारत मिशन का सपना नगर पालिका परिषद बेल्हा में पूरा होता नहीं दिख रहा है। भले ही केंद्र सरकार के स्वच्छता सर्वेक्षण में नगर पालिका ने 83 अंक हासिल कर वाहवाही लूटी हो लेकिन स्वच्छ शहर की आस बेमानी लगती है। तमाम कवायदों के बाद भी नगर पालिका शहर को स्वच्छ शहर नहीं बनाया जा पा रहा है। यह हाल तब है जब शहर में नित नए प्रयोग हो रहे हैं, लेकिन अधिकारियों की हीला हवाली से प्रयोग सफल नहीं हो पा रहे हैं। स्वच्छ शहर का सपना संजोए अधिकारी शहर में आज तक कूड़ा डंपिंग ग्राउंड का निर्माण तक नहीं करा सके हैं। नतीजतन शहर में रोज कचरा इलाहाबाद-फैजाबाद राजमार्ग चिलबिला के किनारे फेंका जाता है। कूड़ा जलाने और उसके सड़ने से धुएं और दुर्गंध से लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। नाला सफाई में लापरवाही से शहरवासियों को हर साल जलभराव की समस्या से दो चार होना पड़ता है। सार्वजनिक स्थानों पर शौचालय निर्माण में भी शहर पिछड़ गया है। खाली प्लाटों में आसपास रहने वाले लोग कूड़ा डालते रहते हैं। डोर टू डोर कूड़ा उठाने की योजना भी एक साल से ठंडे बस्ते में है।
बाजारों में सामुदायिक शौचालय नहीं, महिलाएं हो रहीं शर्मसार
शहर में कचहरी समेत पांच सार्वजनिक शौचालय बने हैं। शहर में महिलाओं के लिए अलग से शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है। सबसे अहम बात यह है कि बाजार में महिलाओं के लिए शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है। जिससे खरीदारी करने के लिए आने वाली महिलाओं को शर्मसार होना पड़ता है। कहने को तो स्टेशन परिसर में शौचालय बना है लेकिन यहां का माहौल और भीड़ के चलते महिलाएं प्रयोग नहीं करतीं। पंजाबी मार्केट, सब्जी मंडी, चौक घंटाघर, बाबागंज व अन्य सभी स्थानों पर लोगों के लिए शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में बाजार आईं महिलाओं को जरूरत के समय गली व सूनसान स्थल खोजना पड़ता है। जहां लोगों के अचानक आ जाने से उन्हें शर्मसार होना पड़ता है।
नाले चोक, गलियों में जलभराव
हर साल नाला सफाई के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाते रहे हैं। दावा किया जाता है कि इस बार जलभराव नहीं होगा। लेकिन कमीशनबाजी के चक्कर में नाला सफाई में भी खानापूर्ति की जाती है। फौरी तौर पर नाले साफ होते हैं। जिसके चलते गर्मी में भी गलियां जलभराव से अछूती नहीं रहती हैं। सड़कों पर बहते गंदे पानी के बीच रहकर लोग जीवनयापन करने को मजबूर हैं। नारकीय जीवन जी रहे लोगों को लगता है कि नगर पालिका ने भी खुद उनके हाल पर छोड़ दिया है।
मोबाइल टायलेट हो गए हैं बदहाल
शहर में कई साल पहले मोबाइल टायलेट रखवाए गए थे। नया माल गोदाम रोड, हादीगंज समेत कई इलाके में मोबाइल टायलेट नगर पालिका ने रखवाया था। मौजूदा समय में अधिकांश टूट गए हैं। जिसमे लोग झांकना तक पसंद नहीं करते।
कूड़े के ढेर से उठता है दुर्गंध, सांस लेना मुश्किल
तमाम दावाओं के बावजूद नगर पालिका कूड़ा कचरा निस्तारण की उचित व्यवस्था नहीं कर पा रहा है। शहर में प्रतिदिन 40 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। शहर की सफाई में निकलने वाले कचरे को निस्तारित करने के लिए कोई स्थल न होने से चिलबिला -अंतू रोड, इलाहाबाद-फैजाबाद राजमार्ग, गायघाट रोड समेत अन्य मार्गों के किनारे प्रतिदिन कई मीट्रिक टन कचरा फेंका जा रहा है। कचरे की दुर्गंध से लोगों का सांस लेना दुश्वार हो जाता है। इससे स्थानीय निवासियों को सांस व पेट से संबंधित बीमारियां घेर रहीं हैं। कूड़ा डंप करने के लिए सालों डंपिंग ग्राउंड निर्माण की कवायद शुरू हुई थी। पूरे केशवराय में डंपिंग ग्राउंड की जमीन मिली थी लेकिन रास्ते के अभाव में कूड़ा नहीं पहुंच सका। शिवसत में चिन्हित जमीन भी फेल हो गई।
मनमर्जी से उठाते हैं कूड़ा
नगर पालिका के 25 वार्डों में मनमर्जी से कूड़ा उठाया जाता है। सफाई कर्मियों का मुख्य लक्ष्य मुख्य मार्ग ही होते हैं। नियमित 97 के अलावा संविदा पर 70 तैनात के अलावा ठेके पर भी 111 सफाई कर्मचारी रखे गए हैं। रोस्टर के अनुसार घरों से कूड़ा उठाने की योजना ठंडे बस्ते में चली गई। अब पालिका कर्मी मन मुताबिक वार्ड से ही कूड़ा उठाते हैं।
शहर को स्वच्छ बनाने की कोशिशें चल रहीं हैं। वार्डों में स्वच्छता समितियों का गठन किया गया है। कूड़ा निस्तारण की भी व्यवस्था कराई जा रही है। शहर में नए पब्लिक टायलेट बन रहे हैं। जल्द ही बाहर से आने वाले लोगों की दुश्वारियां दूर हो जाएंगीं।
मनोज, ईओ नगर पालिका/ अपर जिलाधिकारी