डूब गए 48 लाख, अब नए सिरे से बनेगा सीवर ट्रीटमेंट प्लांट
8 साल से बनकर तैयार प्लांट के उपकरणों को चट कर गया जंग
नशेड़ी चुराते रहे उपकरण, फिर पूना की कंपनी ने किया सर्वे
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। शहर में सई नदी के किनारे आठ साल पहले लगा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पूरी तरह खराब हो गया है। सारे उपकरणों को जंग चट कर गया है। कुछ चोर उठा ले गए। जलनिगम की लापरवाही और घपलेबाजी के चलते इस योजना का लाभ शहरियों को अभी तक नहीं मिल सका। अब नए सिरे से पूना की कंपनी ने सर्वे करने के बाद 48 लाख का इस्टीमेट तैयार कर जलनिगम को सौंपा है। जिसकी धनराशि के लिए पत्र विभागीय अधिकारियों को भेजा गया है।
सपा के पूर्व सांसद अक्षय प्रताप सिंह गोपालजी के प्रयास से शहरियों को सीवर योजना मिली। सई नदी के किनारे सबसे पहले सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जाना था। कुछ अवरोध के बाद आठ करोड़ की लागत से सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनना शुरू हुआ। वर्ष 2010 में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनकर तैयार हो गया। कई सालों बाद शहर में पाइप लाइन बिछाने का काम शुरू हुआ जो अभी तक चल रहा है। जलनिगम की लापरवाही से अभी तक ट्रीटमेंट प्लांट का ट्रायल तक नहीं शुरू हो सका। सदर बाजार चौराहे के पास पाइप लाइन को कनेक्ट किया जाना बाकी है। इन आठ सालों में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के उपकरण जंग खा गए। बहुत से उपकरण नशेड़ी चुरा ले गए। जिससे वह अपने नशे की पूर्ति कर लिए। प्लांट की देखरेख का जिम्मा पाने वाले जलनिगम के अधिकारी केवल औपचारिता ही निभाते रहे। प्लांट के अधिकांश उपकरण खराब हो गए थे। जिनको बदलने के बाद ही प्लांट चालू हो सकता था। इसलिए प्लांट बनाने वाली पूना की कंपनी को जलनिगम ने बुलाया। टीम के इंजीनियरों ने सर्वे करने के बाद करीब 48 लाख के उपकरण को खराब बता दिया। सूत्रों की मानें तो बहुत से कलपुर्जे गायब भी थे। सभी उपकरण फिर से लगाने के बाद ही प्लांट चालू होने का भरोसा इंजीनियरों की टीम ने दिया। कंपनी के इस्टीमेट को जलनिगम ने मुख्य अभियंता जलनिगम को भेजा है ताकि जल्द से जल्द बजट जारी हो सके। इसके बाद सीवर ट्रीटमेंट प्लांट चालू करने की दिशा में काम प्रारंभ हो। फिलहाल इस साल भी शहरियों को सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का लाभ मिलने की संभावना कम ही दिख रही है।
वर्जन------
सीवर ट्रीटमेंट प्लांट शुरू करने की कवायद चल रही है। अभी कुछ दिनों पहले ही आया हूं। पहले क्या-क्या हुआ है। इसकी कोई जानकारी नहीं है। इस दिशा में पत्रावली मुख्य अभियंता को भेजी गई है।
सुनील कुमार यादव, एक्सईएनज़लनिगम।
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18 करोड़ की थी परियोजना
शहरियों को सीवेज ट्रीटमेंट को लाभ दिलाने के लिए सरकार की ओर से करीब 18 करोड़ की परियोजना जलनिगम की देखरेख में बनाने के लिए 12 साल पहले टेंडर निकाला गया। टेंडर के बाद भी योजना लटकी रही। कच्छप गति से प्रारंभ निर्माण कार्य मौजूदा समय में भी चल रहा है। इसका शहरियों को लाभ नहीं मिल सका। हर साल दावा होता रहा कि बस कुछ दिनों बाद सीवरेज सिस्टम काम करने लगेगा लेकिन हकीकत इससे उलटा ही रहा।
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दूसरे चरण में जोड़े जाएंगे मोहल्ले व गलियां
शहर में सीवरेज सिस्टम की योजना के तहत पहले चरण में मुख्य मार्गों पर पाइप लाइन बिछाने व उसे प्लांट तक पहुुंचाया जाना था। प्लांट की टेस्टिंग के बाद दूसरे चरण में मोहल्ले व गलियों में पाइप लाइन बिछाकर लोगों के घरों के शौचालय पाइप लाइन से कनेक्ट होने थे। यदि बहुत प्रयास करने के बाद बीत रहे साल में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट शुरू भी हो जाता है। इसके बाद भी शहरियों को इसका लाभ नहीं मिलने में वक्त लगेगा। जलनिगम का दावा कब हकीकत में बदलेगा, यह तो समय बताएगा। फिलहाल अभी तक शहरियों को पहले ही चरण का लाभ नहीं मिल सका।
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एक नजर शहर के हालात पर
0 नगर पालिका क्षेत्र में वार्डों की संख्या -25
0 शहर की जनंसख्या -52 हजार
0 शहर में बिछाई गई सीवर पाइप लाइन- 5 किमी
0 नालों के पानी के लिए अलग होगी व्यवस्था
0 कई मोहल्लों की आबादी सीवर लाइन से रहेगी अछूती
0 चिलबिला ,महुली के मुख्य मार्ग पर भी नहीं बिछी पाइप लाइन