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प्रदूषण फैला रहीं रोडवेज बसें, बीमार पड़ रहे सड़क किनारे रहने वाले लोग 17-41-13

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प्रतापगढ़। बेल्हा के बस डिपो की 12 से अधिक बसें रोड पर चलने लायक नहीं हैं। बसों की कभी प्रदूषण जांच भी नहीं कराई जाती है। जबकि इन बसों को इलाहाबाद, कानपुर, दिल्ली, लखनऊ फैजाबाद और गोरखपुर आदि की सड़क पर चलाया जा रहा है।
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मॉडल बस स्टैंड से करीब 46 पुरानी और लगभग 22 नई बसों का हर दिन संचालन किया जा रहा है। सड़कों पर फर्राटा भर रही इन बसों की हालत खस्ताहाल है। पुरानी बसों से निकल रहे काले धुएं वातारण को प्रदूषित कर रहे हैं। मेंटनेंस के नाम पर विभाग की ओर से महज खानापूर्ति की जा रही है। धुंए की भी विभाग की ओर से कभी जांच नहीं कराई जाती है। जबकि यातायात विभाग के नियमों पर गौर करें तो हर छह माह पर छोटे से लेकर बड़े वाहनों से पैदा हो रहे प्रदूषण की जांच कराई जाती है। जांच में कमियां मिलने पर सुधार के निर्देश दिए जाते हैं। दोबारा पकड़े जाने पर अर्थदंड भी लगाया जाता है। वाहनों को इसके लिए सर्टिफिकेट भी मुहैया कराया जाता है, लेकिन परिवहन विभाग मनमाना रवैया अपनाए हुए है। बताया जाता हे कि प्रदूषण जांच रिपोर्ट भी अब मनमाने तरीके से दिया जा रहा है।

रकम मिलते ही प्राइवेट संस्था बिना जांच किए ही वाहन मालिक को फर्स्ट क्लास की रिपोर्ट थमा देते हैं। ऐसे में इस तरह के वाहन सड़कों पर प्रदूषण फैला रहे हैं, लेकिन सर्टिफिकेट होने के कारण शिकंजे में नहीं आ पाते हैं। वाहनों से वातावरण में फैल रहे प्रदूषण से लोग तरह तरह की बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. मनोज खत्री ने बताया कि वाहनों से निकलने वाले धुएं वायु प्रदूषण में आते है। प्रदूषित वातावरण की वजह से लोग स्किन एलर्जी के शिकार हो जाते हैं। बस स्टेशन मास्टर कंचन सिंह का कहना है कि समय-समय पर रोडवेज बसों के प्रदूषण की जांच कराई जाती है। आवश्यकता पड़ने पर बस की मरम्मत कराई जाती है। चार माह पहले पदभार ग्रहण करने के बाद दस बसों की रिपेयरिंग के साथ ही प्रदूषण जांच रिपोर्ट भी ली गई थी। हो सकता है धुलाई के कारण प्रदूषण जांच रिपोर्ट का स्टीकर बसों से निकल गया हो।
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