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भाजपा की चुप्पी से विरोधियों की बढ़ी बेचैनी

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भाजपा की चुप्पी से विपक्षी दलों की बढ़ी बेचैनी
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गठबंधन करने वाली पार्टियों की टिकी हैं नजरें
31 मार्च तक प्रत्याशी की घोषणा कर सकती है पार्टी
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। भाजपा की चुप्पी से विपक्षी दलों की बेचैनी बढ़ गई है। गठबंधन धर्म का पालन करने वाली पार्टियों ने प्रत्याशियों से तैयारी करने को कहा है, मगर उनकी नजरें भाजपा प्रत्याशी पर टिकी हुई हैं। प्रतापगढ़ सीट को लेकर भाजपा ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। अभी यह भी साफ नहीं हो सका है कि यहां से भाजपा का कोई उम्मीदवार चुनाव लड़ेगा या फिर सीट गठबंधन के खाते में जाएगी। टिकट के लिए भाजपा के साथ अपना दल के नेताओं ने भी दिल्ली में डेरा डाल रखा है।
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प्रतापगढ़ संसदीय सीट से कांग्रेस ने रत्ना सिंह को उम्मीदवार बनाया है। सपा-बसपा के गठबंधन में यह सीट बसपा के खाते में गई है। पार्टी ने यहां से अशोक त्रिपाठी को लोकसभा प्रभारी बनाया है। अब सबकी नजरें भाजपा की तरफ टिकी हैं। 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में प्रतापगढ़ संसदीय सीट से भाजपा-अपना दल गठबंधन के तहत अपना दल प्रत्याशी हरिवंश सिंह को बनाया था। मगर इस वर्ष अपना दल में फूट पड़ने के कारण निवर्तमान सांसद ने अपनी स्वंय की पार्टी बना ली है। अपना दल (एस) से भाजपा का जो समझौता हुआ है, उसके तहत अभी अपना दल को सिर्फ मिर्जापुर की सीट मिली है। प्रतापगढ़ सीट को लेकर अभी भी सस्पेंस बरकार है। इस सीट पर भाजपा का कब्जा सिर्फ 1998 में रहा है। भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले रामविलास वेदांती को भारी मतों से जीत मिली थी। इसके बाद भाजपा ठोस प्रत्याशी का चयन नहीं कर पाई और गैरभाजपा प्रत्याशी चुनाव जीतते रहे। वर्ष 2014 के चुनाव में मोदी लहर चली और अपना दल प्रत्याशी ने महज 14 दिन चुनाव -प्रचार कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। ऐसे में विरोधियों की नजर भाजपा प्रत्याशी की घोषणा पर टिकी हुई हैं।
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