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रेफरल सेंटरों पर जल्द बनेंगे एनबीएसयू

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रेफरल सेंटरों पर जल्द बनेंगे एनबीएसयू
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नवजात बच्चों के इलाज के लिए नहीं आना होगा जिला महिला अस्पताल
शासन ने दिया सीएमओ को आदेश, लालगंज, कुंडा और पट्टी सीएचसी में होगी व्यवस्था
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। नवजात बच्चों के इलाज के लिए जिले के लोगों को अब भागकर जिला महिला अस्पताल नहीं आना होगा। शासन ने जिले के रेफरल सेंटरों पर नवजात बच्चों को भर्ती करने के लिए एनबीएसयू सेंटर की स्थापना करने का निर्देश दिया है। अभी तक जिले में जिला महिला अस्पताल में एसएनसीयू की व्यवस्था तो है, मगर जनपद के अन्य रेफरल सेंटरों पर नवजात बच्चों को भर्ती कर इलाज करने की कोई सुविधा नहीं है।
नवजात बच्चों को भर्ती करके इलाज करने के लिए महज जिला महिला अस्पताल में 15 बेड का एसएनसीयू वार्ड है। 15 बेड के इस एसएनसीयू में जल्दी जगह नहीं मिलती है। ऐसे में लोगों को परेशान होना पड़ता है। नवजात बच्चों को लेकर प्राइवेट अस्पताल या फिर प्रयागराज का चक्कर काटना पड़ता है। इस दौरान बच्चे दम भी तोड़ देते हैं। इस समस्या को देखते हुए शासन ने सीएमओ को आदेश दिया है कि जनपद के रेफरल सेंटर लालगंज, पट्टी और कुंडा सीएचसी में एनबीएसयू की स्थापना की जाए। जिससे जन्म लेने के तत्काल बाद यदि किसी नवजात की हालत खराब है तो उसका इलाज किया जा सके। यहां हालत में सुधार न हो तो उसे एसएनसीयू रेफर किया जाए। चार दिन पहले जिला महिला अस्पताल का निरीक्षण करने आई कायाकल्प टीम के प्रोग्राम मैनेजर रामायण यादव ने बताया कि जल्द ही यूनिट की स्थापना हो जाएगी। इससे एसएनसीयू से बोझ हट जाएगा। नवजात बच्चों का बेहतर इलाज होगा। उन्होंने बताया कि अस्पताल में जन्म लेने के बाद सभी बच्चों को एक साथ वार्ड में रखा जाता है। ऐसे में इंफेक्शन का खतरा अधिक रहता है। नॉनकॉंफोर्मिंग ब्लंट सूक्ष्म अद्वितीय यूनिट बनने से यह खतरा कम हो जाएगा।
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वर्जन----------
रेफरल सेंटरों पर नॉनकॉंफोर्मिंग ब्लंट सूक्ष्म अद्वितीय सेंटर का निर्माण होना अनिवार्य होता है। शासन के आदेशानुसार काम कराया जाएगा।
एके श्रीवास्तव, सीएमओ।

मगर सरकर के आदेश बाद भी नहीं बनी ब्लड स्टोरेज यूनिट
शासन ने कुंडा, पट्टी और लालगंज सीएचसी में स्थापना के लिए दिया था निर्देश
ब्लड के लिए लोगों को लगाने पड़ते हैं प्रतापगढ़ और प्रयागराज के चक्कर
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। शासन के आदेश के बाद भी जिले के रेफरल सेंटरों पर ब्लड स्टोरेज यूनिट की स्थापना नहीं हो सकी। सीएमओ ने शासन के इस आदेश को रद्दी की टोकरी में डाल दिया। कुंडा, पट्टी और लालगंज रेफरल सेंटर पर मरीजों को खून की जरूरत पडने पर लोगों को भागकर प्रतापगढ़ या फिर प्रयागराज जाना पड़ता है।
जनपद में 28 सीएचसी का संचालन शासन स्तर से हो रहा है। इनमें से कुंडा, पट्टी और लालगंज सीएचसी को शासन ने रेफरल सेंटर का दर्जा दिया है। रेफरल सेंटर पर ऑपरेशन के साथ मरीजों की सभी प्रकार की जांच करने का निर्देश है। आपरेशन होने के कारण इन सेंटरों पर मरीजों को जब तब खून की जरूरत पड़ती रहती है। ऐसे में उनके तीमारदारों को खून की व्यवस्था करने के लिए भागकर प्रतापगढ़ या फिर प्रयागराज जाना पड़ता है। जिससे उन्हें काफी परेशानी होती है। शासन ने इस समस्या को देखते हुए तीनों रेफरल सेंटरों पर ब्लड स्टोरेज यूनिट बनाने के लिए सीएमओ को आदेश दिया था। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग के मुखिया ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। इससे लोगों की समस्या जस की तस बनी हुई है। ब्लड स्टोरेज तो दूर एक्सरे और अल्ट्रासाउंड तक की व्यवस्था नहीं की जा सकी है। ऑपरेशन तक नहीं किए जा रहे हैं। आपरेशन के नाम पर एक-एक सर्जन की तैनाती की गई है, लेकिन बेहोशी के एक भी डॉक्टर नहीं हैं। जबकि जनपद के तीनों रेफरल सेंटर जिला मुख्यालय से काफी दूर हैं। कुंडा की दूरी तो करीब 70 किमी है। ऐसे में रात के वक्त अगर किसी मरीज को खून की जरूरत पड़ती है तो उनके साथ डाक्टरों के सामने भी मुसीबत खड़ी हो जाती है।
इनसेट--------
पूर्व सीएमओ के कार्यकाल में शासन ने दिया था आदेश
पूर्व सीएमओ राजकुमार नैय्यर के कार्यकाल में ही शासन ने रेफरल सेंटरों पर ब्लड स्टोरेज यूनिट की स्थापना करने के लिए कहा था। इतना ही नहीं प्रत्येक ब्लड स्टोरेज यूनिट में कम से कम हर ग्रुप के चार से पांच यूनिट ब्लड रखने के लिए आदेश आया था, लेकिन कुछ नहीं हो सका।
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वर्जन--------
पूर्व सीएमओ के कार्यकाल में शासन ने कौन सा आदेश दिया, यह मुझे नहीं पता है। रेफरल सेंटरों पर ब्लड स्टोरेज यूनिट होना चाहिए। यह शासन की गाइड लाइन में लिखा है। इसके लिए पत्राचार किया जाएगा। बजट आने पर ब्लड स्टोरेज यूनिट की स्थापना कराई जाएगी।
अरविंद कुमार श्रीवास्तव, सीएमओ।
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