प्रतापगढ़। 31 दिसंबर 2017 तक जिले को ओडीएफ करने के आसार कम हैं। जिले के 17 विकास खंडों के 2324 राजस्व गांवों में अभी तक मात्र 326 गांव ही ओडीएफ हुए हैं। जनपद में अभी तक करीब 85000 शौचालय का ही निर्माण कराया गया है, जबकि 2,26,574 शौचालय का निर्माण कराया जाना है।
जिले को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) करने के लिए 31 दिसंबर 2017 का समय निर्धारित किया गया था। मगर अभी तक शौचालय बनाने का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। शौचालयों के निर्माण की स्थिति पर गौर किया जाय, तो जिले में करीब 3,12,000 लाख शौचालयों का निर्माण कराने के लिए पात्रों का चयन किया गया है। लेकिन अभी तक 326 गांव को ओडीएफ घोषित करके 85,000 शौचालयों का ही निर्माण कराया गया है। जिले के 1998 गांवों के करीब 2,26,574 पात्रों के घर शौचालय का निर्माण कराया जाना है। समय इतना कम है कि इस अवधि में शौचालयों का निर्माण कराना संभव नहीं होगा। हालांकि विभागीय अधिकारी बजट का रोना रो रहे हैं। विभागीय अधिकारियों की मानें तो अभी शौचालय का निर्माण कराने के लिए लगभग एक करोड़ रुपये की आवश्यकता है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो चालू वित्तीय वर्ष में लगभग 56.23 करोड़ रुपये विभाग को मिल चुके हैं। इसमें अधिकांश धनराशि प्रचार-प्रसार में ही खर्च हो जा रहे हैं।
स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत ग्राम पंचायतों को धनराशि आवंटित करके शौचालय का निर्माण कराने को कहा जाता है। मगर शौचालय के नाम पर प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी हजम कर जाते हैं। इससे विभाग का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाता है । जिले की करीब 170 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जहां शौचालय निर्माण के लिए दी गई धनराशि में गोलमाल किया गया है। सीडीओ की जांच में आवंटित धनराशि के सापेक्ष शौचालयों का निर्माण नहीं होने पर 170 प्रधानों को नोटिस थमाकर जवाब-तलब किया गया है। डीपीआरओ शशिकांत पांडेय का कहना है कि जिले को ओडीएफ घोषित करने के लिए 31 दिसंबर 2017 तक समय दिया गया था। मगर जिले में बड़ी संख्या में शौचालय का निर्माण कराया जाना है। जो इतने कम समय में संभव नहीं है। शासन से धनराशि की मांग की गई है, आते ही शौचालय निर्माण का अभियान चलाया जाएगा।- शशिकांत पांडेय, डीपीआरओ,प्रतापगढ़।