प्रतापगढ़। प्रदेश में बेहतर शिक्षा के दावे हवा हवाई साबित हो रहे। हाल तो यह है कि अभी तक साठ फीसदी बच्चे फर्श पर बैठने को मजबूर हैं और करीब 250 स्कूलों में विद्युतीकरण नहीं हो सका। कहीं एमडीएम राम भरोसे है तो कहीं विद्यालय मवेशियों के अड्डे बने हैं। इस तरह जनपद में प्राइमरी शिक्षा का स्तर फिसड्डी होता जा रहा है।
जनपद में 2042 प्राइमरी स्कूल और 733 मिडिल स्कूल हैं। प्राइमरी स्कूलों में लगभग दो लाख 45 हजार बच्चे हैं। मिडिल स्कूलों में भी 68 हजार से अधिक बच्चे हैं। आज भी 250 स्कूलों में विद्युतीकरण नहीं हो सका। यह आंकड़ा बेसिक शिक्षा विभाग का है। बहुत से ऐसे स्कूल हैं जहां विद्युतीकरण के साथ ही वायरिंग भी हो गया, लेकिन बल्ब नहीं जले। ऐसे स्कूलों में गर्मी से बचने के लिए गुरुजी कहीं पेड़ों की छाया में तो कहीं बरामदे में बैठकर पढ़ाते हैं। अभी तक 62 फीसदी स्कूलों में ही फर्नीचर की व्यवस्था हो सकी है। जिले में कई स्कूलों में बच्चे फर्श पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। इनकी बानगी आपको शहर से लेकर गांव के स्कूलों में देखने को मिल जाएगी। बहुत से स्कूलों में पीने के पानी की समस्या है।
ग्रामीण अंचलों के स्कूल बंद होने के बाद आवारा पशुओं का अड्डा बन जाते हैं। स्कूलों की सुरक्षा के लिए भले ही चहारदीवारी बनी है। कुछ स्कूल की चहारदीवारी गिर गई है तो किसी का गेट टूट गया है। इसके कारण शाम होते ही अराजकतत्वों का स्कूल ठिकाना बन जाते हैं। वहां आवारा पशु भी अड्डा बना लेते हैं। दूसरे दिन बच्चे व रसोइया को सफाई करनी पड़ जाती है। बच्चों को सेहतमंद बनाने के लिए एमडीएम योजना संचालित है, लेकिन वह रामभरोसे ही है। शायद ही किसी दिन होगा जब मेन्यू के अनुसार बच्चों को भोजन स्कूलों में दिया जाता हो। फल और दूध मिले बच्चों को महीनों गुजर जाता है। इस बाबत प्रधानाध्यापकों का कहना होता है कि उन्हें समय से रुपये ही नहीं मिलते। वहीं बेसिक शिक्षा अधिकारी का कहना है कि प्राइमरी शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। जो भी खामियां हैं, उसे दूर करने के लिए प्रस्ताव भेजा जाता है। सभी स्कूलों में विद्युतीकरण के लिए बिजली विभाग को धनराशि व वायरिंग के लिए हेडमास्टरों के खाते में रुपये भेजे जा चुके हैं। रिमाइंडर भी भेजा जा रहा है।
बेसिक शिक्षा अधिकारी।