जिले में गर्मी की शुरुआत में ही पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। सामान्य औसत से कम बरसात होने के कारण अप्रैल में ही हैंडपंप जवाब देने लेगे हैं। जिले के 17 विकास खंडों में अभी तक 6,733 हैंडपंप तौबा बोल चुके हैं। सवाल यह उठता है कि इन हैंडपंपों का रीबोर कौन कराएगा। जलनिमग से अधिकार छीन लिया गया है और प्रधानों के पास बजट नहीं है। ऐसी दशा में दिन-प्रतिदिन पेयजल संकट गहराता जा रहा है।
जिले में सामान्यतया प्रतिवर्ष 997.90 मिमी बरसात होनी चाहिए, मगर इस वर्ष मात्र 823.40 मिमी ही बरसात हुई थी। 174.5 मिली बरसात कम हुुई। इसका असर भूजल स्तर पर पड़ा है। बरसात कम होने का असर यह रहा कि गर्मी के दस्तक देते ही हैंडपंप तौबा बोलने लगे हैं। जिले के 17 विकास खंडों से मिली रिपोर्ट के मुताबिक अभी तक 6,733 हैंडपंप जवाब दे चुके हैं। जो हैंडपंप चल भी रहे हैं, वह पानी की जगह कीचड़ और बालू उगल रहे हैं।
ऐसेे में यह पानी न तो मनुष्यों के काबिल है और न ही पशुओं के लिए ही प्रयोग किया जा सकता है। हैंडपंपों की मरम्मत और रीबोर कराने का अधिकार ग्राम पंचायतों को दिया गया है। पहले यह अधिकार जलनिगम को था, मगर बाद में इस पर रोक लगा दी गई। ऐसे में जलनिगम यह कहकर हाथ खड़े कर दे रहा है कि उसके पास न तो रुपये हैं और न ही रीबोर कराने का अधिकार। इधर ग्राम प्रधान भी बजट नहीं होने का रोना रो रहे हैं।
दरअसल, जो हैंडपंप किसी के दरवाजे पर लगे हैं, वह व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी समझकर ठीक करवा ले ुरहा है, मगर जो सार्वजनिक स्थल पर लगे हुए हैं, उन्हें देखने वाला कोई नहीं है। इससे दिन-प्रतिदिन पेयजल की समस्या गहराती जा रही है। अगर हैंडपंपों को ठीक कराने के लिए कोई पहल नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में और समस्या गहरा सकती है।
चंद्रिकनधाम में आठ हैंडपंप ठप
संडवाचंद्रिका विकास क्षेत्र स्थित मां चंद्रिकनदेवी धाम में आठ हैंडपंपों के अचानक खड़े हो जाने से भक्तों को प्यास बुझाना भारी पड़ रहा है। मेला कमेटी के अध्यक्ष हरिमंगल सिंह ने सीडीओ को पत्र लिखकर अविलंब ठीक कराने की मांग की है। प्रत्येक मंगलवार को लगने वाले मेले में अमेठी, रायबरेली, सुल्तानपुर से बड़ी संख्या में भक्त आते हैं।
रिबोर होने के बाद भी नहीं उगल रहा पानी
संडवा चंद्रिका के पूर्व माध्यमिक स्कूल लोहंगी में लगे हैंडपंप रीबोर होने के बाद भी पानी नहीं दे रहा है। इससे बच्चों को पीने के पानी के लिए गांव में भटकना पड़ता है। स्कूल के हेडमास्टर ने कई बार बीएसए और जलनिगम को पत्र लिखा, मगर अभी तक ठीक कराने की दिशा में कोई पहल नहीं हुई है।
हैंडपंपों की मरम्मत और रीबोर कराने का अधिकार हम लोगों से छीनकर ग्रामपंचायतों को दे दिया गया है। शासन और प्रशासन हैंडपंपों के रिबोर के लिए कोई बजट नहीं दिया है।
ओमवीर सिंह, अधिशासी अभियंता, जलनिगम।
हैंडपंपों की मरम्मत, रीबोर कराने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को दी गई है। चौदहवें वित्त आयोग और राजवित्त आयोग की धनराशि से ग्राम प्रधान अविलंब हैंडपंपों को ठीक कराएं। अगर किसी ग्राम पंचायत में धनराशि खर्च हो गई है तो क्रेडिट पर वह हैंडपंप को ठीक करा दें, बजट आने पर उनका भुगतान कर देंगे।
एसके पांडेय, डीपीआरओ।