जिले के 50 प्रतिशत विद्युत उपकेंद्र आजादी के जमाने के विद्युत पैनल के सहारे चल रहे हैं। गर्मी के दिनों में लोड बढ़ने पर इनके फुंकने का सिलसिला शुरू हो जाता है। गर्मी व बारिश के दिनों में अधिकांश विद्युत उपकेंद्रों की विद्युत आपूर्ति बदहाल पैनलों के चलते ही प्रभावित होती है। इसका खामियाजा विद्युत उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ता है। गर्मी का मौसम सिर पर है, मगर पैनलों को दुरुस्त कराने व बदलने को लेकर अब तक कोई पहल नहीं की गई है। ऐसे में इस बार विभाग की बदइंतजामी के चलते उपभोक्ताओं पर बिजली अव्यवस्था की मार झेलनी पडे़गी। विभागीय अधिकारी इसे लेकर तनिक भी संजीदा नहीं हैं।
जिले में चार विद्युत वितरण पारेषण खंड हैं। रानीगंज, सदर, लालगंज व कुंडा। इसके तहत जिले में कुल 67 विद्युत उपकेंद्र हैं। शासन ने शहर में 24 व गांव में 18 घंटे बिजली आपूर्ति करने का निर्देश दिया है। आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त न होने से उपभोक्ताओं को रोस्टर के मुताबिक बिजली नहीं मिल पाती है। सबसे ज्यादा दिक्कत गर्मी के दिनों में होती है। लोड अधिक होने पर आपूर्ति व्यवस्था चरमरा जाती है। इसकी मुख्य वजह विद्युत उपकेंद्रों के बदहाल इनकमिंग व आउटगोइंग पैनल है। दरअसल, जिले के रानीगंज, पट्टी, लालगंज, कुुंडा, सदर क्षेत्र के अधिकांश विद्युत उपकेंद्र ऐसे हैं जिनके पैनल आजादी के जमाने के हैं। लंबे समय से उन्हें बदला नहीं जा सका है। गर्मी बढ़ने पर या फिर अधिक बारिश होने पर ये पैनल जवाब दे जाते हैं। कभी पैनलों में धमाका होता है तो कभी आग की लपटें उठती हैं और आपूर्ति व्यवस्था ठप हो जाती है।
जिले में टेक्नीशियन की टीम न होने से गैरजनपद से उन्हें बुलाया जाता है। एक से दो दिन तक विद्युत उपकेंद्र की आपूर्ति प्रभावित रहती है। इस बार भी गर्मी के दिनों में विद्युत पैनल आपूर्ति व्यवस्था को पलीता लगाएंगे। तापमान बढ़ने से गर्मी अब असर दिखाने लगी है। विद्युत विभाग की ओर से बदहाल पैनलों को दुरुस्त कराने व बदलने को लेकर अब तक कोई पहल शुरू नहीं की है। ऐसे में इस बार भी उपभोक्ताओं को गर्मी के महीने में बिजली अव्यवस्था का दंश झेलना पडे़गा। अधिशाषी अभियंता प्रथम चंद्रमा प्रसाद ने बताया कि जिन पैनलों में खामी है, उन्हें चिह्नित किया गया है। बजट भी स्वीकृत हो चुका है। लॉकडाउन के चलते कार्य शुरू नहीं हो सका। जल्द ही उन्हें बदला जाएगा।
विद्युत उपकेंद्र पर दो पैनल होते हैं। इनकमिंग व आउट गोइंग। मेन लाइन सीधे मुख्य ट्रांसफार्मर में आती है। इसके बाद यहां से सप्लाई सीधे इनकमिंग पैनल में पहुंचती है। फिर आउटगोइंग पैनल के माध्यम से फीडरों में और फीडरों के सहारे आपूर्ति शुरू होती है।