नगर पालिका ने वर्ष 2022 में पूरे केशवराय व महुली में मॉडल तालाब निर्माण के लिए 50 लाख रुपये खर्च किए थे। जिम्मेदारों का दावा था कि इन तालाबों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। दो साल बीतने के बाद पर्यटन स्थल तो दूर मॉडल तालाब भी तैयार नहीं हो सके है।
जबकि बजट पूरा खर्च हो गया। अमर उजाला ने मुद्दा उठाया तो ईओ ने निर्माण और भुगतान संबंधी पत्रावली तलब कर ली। पत्र जारी होने के सप्ताह भर बाद भी जिम्मेदार पत्रावली उपलब्ध कराने से भाग रहे हैं।
16 दिसंबर 2022 को तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष प्रेमलता सिंह ने दोनों मॉडल तालाबों के सौंदर्यीकरण के कार्य का शिलान्यास किया था। मॉडल तालाबों के सपनों को हकीकत के पंख नहीं लग सके। शहर के महुली स्थित मॉडल तालाब में बाजार का गंदा पानी जमा है।
तालाब की चहारदीवारी, विद्युतीकरण, फुलवारी, फव्वारा, सीमेंट की कुर्सियां, आकर्षक लाइट व इंटरलाॅकिंग सड़क तक नहीं बनाई गई। इसमें 22 लाख रुपये खर्च हो गए, लेकिन काम पूरा नहीं हुआ। पूरे तालाब में सिर्फ जलकुंभी ही नजर आ रही है।
वहीं, पूरे केशवराय के मॉडल तालाब की स्थिति और भी बदतर है। यहां इंटरलॉकिंग सड़क जगह-जगह बह गई है। तालाब के चारों ओर गंदगी का अंबार लगा है। विद्युतीकरण, फव्वारा, पार्क समेत अन्य सुविधाएं मुहैया नहीं हो सकीं। सिर्फ नाम का मॉडल तालाब है। इसके निर्माण और सौंदर्यीकरण पर भी 28 लाख रुपये खर्च किए गए थे।
अमर उजाला में 50 लाख रुपये खर्च होने के बाद भी मॉडल तालाब में जलकुंभी... शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद नगर पालिका के ईओ राकेश कुमार ने संबंधित पत्रावली तलब की। जो सप्ताह भर बाद भी उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। दोनों वार्ड के नागरिकों का आरोप है कि मॉडल तालाब के नाम पर गोलमाल किया गया। इसकी जांच होनी चाहिए।