फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हर रोज शोधन में बर्बाद हो रहा 45 हजार लीटर पानी

Thu, 05 Apr 2018 11:08 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
विज्ञापन
आरओ वाटर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
तापमान बढ़ते ही जिले में पानी की खपत लगातार बढ़ती जा रही है। लोगों को पीने का पानी शुद्ध चाहिए, लिहाजा लोग आरओ का पानी तलाशते हैं। शहर का पानी खारा होने के चलते आरओ पानी की अधिक डिमांड है। शहर और तहसीलों के बाजारों में 30 से अधिक आरओ प्लांट लगे हैं। जानकारों की मानें तो पानी शोधन के नाम पर हर रोज 40 हजार लीटर पानी बर्बाद होकर नालियों में बह रहा है। शहर के बेगमवार्ड, दहिलामऊ, मकंद्रूगंज, भैरोपुर, अजीत नगर, पूर्वी सहोदरपुर, लालगंज, रानीगंज, पट्टी व कुंडा तहसील में स्थित आरओ प्लांट पर डेढ़ हजार लीटर पानी शोधित किया जाता है। पानी शोधित करने में आधा बर्बाद होता है। अमूमन 15 लीटर पानी शुद्ध करने में 30 लीटर पानी लगता है।
विज्ञापन


जाने क्या है आरओ वाटर
शुद्ध पानी के नाम पर आजकल लोग आरओ का पानी पीने के लिए मांगते हैं। आरओ का मतलब रिवर्स आस्मोसिस है। इस प्रक्रिया से पानी का भारीपन दूर होता है। जल शोधकों में से एक आरओ दूषित पानी वाले इलाकों में आर्सेनिक और फ्लोराइड जैसे विषाक्त पदार्थों को शोषित कर देता है। बेकार पानी में सल्फेट कैल्शियम, बाईकार्बोनेट्स जैसे पूरी तरह विघटित लवण और कार्बोनिक पदार्थ और आर्सेनिक और फ्लोराइड उच्च मात्रा में होते हैं। शोधन में अशुद्धियां दूर हो जाती हैं।

नियम के बावजूद नहीं बनाए हैं टैंक
आरओ वाटर संचालकों को शोधित जल संचित करने के लिए टैंकों का निर्माण कराना चाहिए ताकि इस पानी का प्रयोग खेती व बागवानी को सिंचित करने और अन्य किसी काम में हो सके। पानी सीमित है और इसे संरक्षित करने की जरूरत है। समय रहते इस ओर ध्यान न दिया गया तो आने वाली पीढ़ी को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
विज्ञापन


आरओ प्लांटों को पालिक भेजेगी नोटिस
नगर पालिका के ईओ अवधेश यादव का कहना है कि सभी आरओ प्लांट को नोटिस दिया जाएगा। वह पानी को खींचकर शोधन के नाम पर बर्बाद कर रहे हैं। नगर पालिका समय-समय पर अपनी पानी की टंकी में सुरक्षित क्लोरीन व अन्य दवा डालकर पानी को शुद्ध बनाती है। अब इस और सुदृढ़ बनाने की योजना तैयार की जा रही है।

बिना जांच फूड विभाग ने दी क्लीनचिट
जिला खाद्य एवं औषधि अधिकारी अमित श्रीवास्तव का कहना है कि हमारे एक्ट में सिर्फ पैकेजिंग ड्रिंकिंग वाटर के नमूने लेने का अधिकार है। समय-समय पर पानी की जांच कराते हैं। हालांकि जिले में अशुद्ध पानी की सप्लाई होने की संभावना कम है।

डाक्टर बोले, हानिकारक है आरओ का पानी
जिला अस्पताल के चिकित्सक डा. आरडी द्विवेदी की मानें तो आरओ पानी के ज्यादा इस्तेमाल से शरीर लवण की कमी हो हो सकती है। पैकिंग वाला पानी लगातार लंबे समय तक पीने से स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और लगातार सेवन से हृदय संबंधी विकार, थकान महसूस होना, मानसिक कमजोरी कमजोरी और मांश पेशियों में ऐंठन या सिरदर्द जैसे कई रोग हो सकते हैं। क्योंकि शोध से पता चला है कि जब आरओ पानी फिल्टर करता है तो वह इस पानी सेे अच्छे व खराब मिनरल्स को पूरी तरह निकाल देता है। उस मशीन को अच्छे और खराब मिनरल्स की पहचान नहीं होती। जहां तक संभव हो क्लोरीन का इस्तेमाल करें। जिससे पानी में उपस्थित लाभदायक बैक्टीरिया नष्ट नहीं होते और इसकी तुलना में यह काफी सुरक्षित होता है। बेहतर होगा कि नियमित होगा कि नियमित आरओ के पानी का प्रयोग न करें।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें