इस साल अप्रैल से अभी तक जिले में डूबने और सर्पदंश से कुल 43 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। जिले में डूबने से 21 और सर्पदंश से 22 मौतें हुई हैं। सर्पदंश व डूबने की सबसे अधिक घटनाएं कुंडा तहसील में हुईं।
कुंडा में ही अभी तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि सदर तहसील में डूबने से छह लोगों की जान जा चुकी हैं। डूबने की घटनाओं को शून्य करने के लिए एडीएम ने बीते साल नगर व ग्राम पंचायतों के माध्यम से चेतावनी बोर्ड के निर्देश दिए थे लेकिन अभी तक दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्रों में चेतावनी बोर्ड तक नहीं लगाए और न ही जागरूकता के लिए शिविर का आयोजन किया गया।
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जिले में साल 2024-2025 में सर्पदंश से 49 और डूबने से 57 मौतें हुई थीं। वहीं, साल 2025-2026 में सर्पदंश से 51 और डूबने से 63 लोगों ने जान गंवाई।
जिला आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ अनुपम शेखर तिवारी ने बताया कि जागरूकता से ही इन दुर्घटनाओं को कम किया जा सकता है। साथ ही दुर्घटना वाले क्षेत्रों में चेतावनी बोर्ड लगाना जरूरी है ताकि लोग सावधान हो सकें।
15 नाविकों को दी लाइफ जैकेट
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सई व गंगा तट के किनारे रहने वाले नाविकों को चिह्नित कर उन्हें लाइफ जैकेट मुहैया कराया है। साथ ही लेखपाल को निगरानी की जिम्मेदारी दी है।
दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्रों में चेतावनी बोर्ड के लिए दोबारा से निर्देश दिए जाएंगे। पंचायत स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के संबंध में अफसरों को निर्देश देंगे ताकि दुर्घटनाओं को कम किया जा सके।
आदित्य प्रजापति, एडीएम